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आंगनबाड़ी केंद्र के जर्जर भवन में सेविका के साथ होते हैं 30 बच्चे

Gautam Lenin | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: August 19, 2017, 11:09 PM IST
आंगनबाड़ी केंद्र के जर्जर भवन में सेविका के साथ होते हैं 30 बच्चे
आंगनबाड़ी केंद्र के चारों तरफ पानी ही पानी

लोहरदगा में एक आंगनबाड़ी केन्द्र जर्जर हो चुके भवन में चलता है. इस आंगनबाड़ी केंद्र के चारों तरफ पानी जमा है. इसकी खबर लेने वाला कोई नहीं है. ऐसा लगता है जैसे किसी अनहोनी का इंतजार किया जा रहा हो.

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लोहरदगा में एक आंगनबाड़ी केन्द्र जर्जर हो चुके भवन में चलता है. इस आंगनबाड़ी केंद्र के चारों तरफ पानी जमा है. इसकी खबर लेने वाला कोई नहीं है. ऐसा लगता है जैसे किसी अनहोनी का इंतजार किया जा रहा हो. यह सांप, बिच्छू और चूहों का निवास स्थल भी है. बच्चे ऐसे ही वातावरण में जमीन पर बैठकर खाते-पीते और पढ़ाई करते हैं.

यह आंगनबाड़ी केंद्र जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित जोरी गडरीपाड़ा में है. आंगनबाड़ी केन्द्र हर पल किसी अनहोनी को आवाज देता रहता है. पल-पल ध्वस्त होता यह भवन न जाने कितने बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़ा कर सकता है. कितनी गोद सूनी हो सकती हैं. लेकिन इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है. इस आंगनबाड़ी भवन की दीवारों पर बड़ी दरारें पड़ गई हैं.

बता दें कि इस आंगनबाड़ी केन्द्र में गांव के करीब तीस बच्चे प्रतिदिन जीवन की शुरुआत का ककहरा सिखने आते हैं. इन बच्चों को यहां पौष्टिक भोजन तो मिलता है, लेकिन यह सबकुछ इस जर्जर हो चुके भवन के अंदर. चारों तरफ पानी के जमाव के बीच खंडहर होते इस भवन में हर तरह के खतरों से अंजान ये मासूम हंसते- खेलते हैं. इन्हें किसी अनहोनी का अंदेशा भी नहीं है.

आंगनबाड़ी केन्द्र की सेविका प्रेशकिला प्यारी केरकेट्टा का कहना है कि भवन और इसके परिसर के वातावरण से संबंधित पदाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है. लेकिन प्रशासनिक उदासीनता की वजह से कुछ नहीं किया जा रहा है. वहीं इस बारे में जब जिले के डीसी को बताया गया तब उन्होंने कहा कि वह इसे गंभीरता से ले रहे हैं और देखेंगे कि क्या किया जा सकता है.

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First published: August 19, 2017, 11:09 PM IST
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