30 वर्षों से मुस्लिम कारीगर ही करते हैं रावण बनाने का काम

कभी सोशल मीडिया की दुनिया से निकल तक देखें तो तमाम देश में भाईचारा और सांप्रदायिक सौहार्द अधिक नजर आएगा. वहीं ऐसी बहुत सी मिसाल देखने को मिलेंगी जिससे पता चलता है कि हिन्दू-मुस्लिम एकता का ताना-बाना कितना मजबूत है.

Gautam Lenin | News18 Jharkhand
Updated: October 13, 2018, 11:05 PM IST
30 वर्षों से मुस्लिम कारीगर ही करते हैं रावण बनाने का काम
लोहरदगा में रावण बनाते मुस्लिम कारीगर
Gautam Lenin | News18 Jharkhand
Updated: October 13, 2018, 11:05 PM IST
कभी सोशल मीडिया की दुनिया से निकल तक देखें तो तमाम देश में भाईचारा और सांप्रदायिक सौहार्द अधिक नजर आएगा. वहीं ऐसी बहुत सी मिसाल देखने को मिलेंगी जिससे पता चलता है कि हिन्दू-मुस्लिम एकता का ताना-बाना कितना मजबूत है. बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक दशहरा पर होने वाले रावण दहन कार्यक्रम को लोहरदगा में बेहतर से बेहतर बनाने की दिशा में वर्षों से मुस्लिम समुदाय भागीदारी करता है. आकर्षण रावण दहन और पटाखों की धूम के पीछे लगे मजदूर बिहार के गया जिले के हैं जो मुस्लिम समुदाय से आते हैं.

दादा-नाना के काल से यह मुस्लिम कारीगर झारखंड के विभिन्न जिले और बिहार की राजधानी पटना में रावण निर्माण कार्य करते आ रहे हैं. धर्म के नाम पर लोगों को बांटने का काम करने वाले लोगों के लिए यह एक बड़ी सीख है जो बुराई को जलाकर राख करने का काम दिन रात कर रहे हैं. लोहरदगा जिला में यह मजदूर पिछले तीस वर्षों से आ रहे हैं. इसके पहले इनके पिता और दादा-नाना काम करने यहां आया करते थे.

केन्द्रीय दुर्गा पूजा समिति के द्वारा प्रति वर्ष इन कुशल मजदूरों को लोहरदगा बुलाने का काम किया जाता है जो झारखंड की राजधानी रांची सहित विभिन्न जिले में रावण निर्माण करते हैं. इनकी कुशल कारीगरी सभी को अपनी ओर खींचती हैं. धर्म की तलवार दूर कर यह सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रहे हैं. आठ मुस्लिम कारीगरों के द्वारा इस रावण का निर्माण किया जा रहा है जो विजयदश्मी के दिन बक्सीडीपा मैदान में दहन किया जाएगा.

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