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लोहरदगा के बरही गांव में आदिकाल से चली आ रही पत्थर मार होली की परंपरा

Gautam Lenin | News18 Jharkhand
Updated: March 21, 2019, 10:19 PM IST
लोहरदगा के बरही गांव में आदिकाल से चली आ रही पत्थर मार होली की परंपरा
पुरानी परंपरा के अनुसार झाड़ीनुमा खूंटे को लेकर दौड़ते युवक और उनपर बरसते पत्थर हवा में साफ देखे जा सकते हैं

गांव के लोगों के द्वारा हरी बोल के साथ खूंटा उखाड़ने के लिए दौड़ा जाता है. जो भी ग्रामीण इस झाड़ी नुमा खूंटे को उखाड़ने की दिशा में दौड़ते हैं, उनपर हजारों की संख्या में मौजूद ग्रामीण पत्थर बरसाने का काम करते हैं.

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कहीं कुर्ता फाड़ तो कहीं लट्ठमार होली. भारत भर में होली मनाने की कुछ अलग-अलग  तरह की पंरपरा हैं. लोहरदगा जिला में भी होली मनाने की आदिकाल से एक अनूठी पंरपरा चली आ रही. यह परंपरा बहुत निराली हैं. यहां इसको पत्थर मार होली के नाम से जाना जाता है. नाम के अनुरुप इस पंरपरा को पत्थर मार कर होली खेली जाती है. लोहरदगा जिला के सेन्हा प्रखंड स्थित बरही गांव में यह होली काफी प्रसिद्ध है. होली के  दिन गांव के मुहाने पर स्थित माता की मंदिर के समक्ष दो झाड़ीनुमा खूंटे गाड़े जाते हैं.

अरंडी और सेमर पेड़ों की डाली के खूंटे इस स्थान पर गाड़ने की परंपरा है. होलिका दहन के बाद यहा यह दो खूंटे गाड़ने का काम किया जाता है. इसके बाद गांव के लोगों के द्वारा हरी बोल के साथ खूंटा उखाड़ने के लिए दौड़ा जाता है. जो भी ग्रामीण इस झाड़ी नुमा खूंटे को उखाड़ने दौड़ते हैं, उनपर हजारों की संख्या में मौजूद ग्रामीण पत्थर बरसाने का काम करते हैं. जब तक खूंटा उखाड़ कर मंदिर तक लाया जाता है, तब तक ग्रामीण पत्थर चलाते रहते हैं. यह पंरम्परा पत्थर मार होली के नाम से जानी जाती हैं.. होली का यह पर्व बड़े सौहार्द और प्रेम के साथ मनाया जाता हैं. इसे देखने दूर दराज से लोग यहां पहुंचते हैं.



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First published: March 21, 2019, 10:19 PM IST
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