लोहरदगा: ठनका से मरने वाली महिला को जिंदा करने के लिए घंटों चला अंधविश्वास का खेल
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लोहरदगा: ठनका से मरने वाली महिला को जिंदा करने के लिए घंटों चला अंधविश्वास का खेल
महिला आठ माह की गर्भवती थी. उसकी मौते के बाद बच्चे ने भी मां के पेट में दम तोड़ दिया. (सांकेतिक फोटो)

परिजनों और ग्रामीणों (Villagers) ने मृत महिला के शव को गोबर के गड्ढे में गाड़कर उसे जिंदा करने की कोशिश की. जब काफी देर तक कोई हरकत नहीं हुई, तो बाद में घटना की सूचना पुलिस (Police) को दी.

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लोहरदगा. दुनिया चिकित्सा विज्ञान के सहारे कोरोना (Corona) जैसी महामारी से जिंदगी को बचाने की जंग लड़ रही है. लेकिन झारखंड के लोहरदगा में मौत के बाद सांसें वापस लाने के लिए अंधविश्वास का लंबा तमाशा किया गया. घटना भंडरा प्रखंड के सोरंदा गांव में गुरुवार को घटी. गांव में वज्रपात (Thunderclap) की चपेट में आने से एक महिला की मौत हो गई. लेकिन अंतिम संस्कार करने के बदले ग्रामीण उसको जिंदा करने में जुट गये. अंधविश्वास का ये खेल घंटों चला, लेकिन भला मुर्दे में कभी जान आ सकती है क्या, वही हुआ थक-हारकर ग्रामीण बाद में पुलिस (Police) को सूचना दी. पुलिस मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया.

जानकारी के मुताबिक बारिश के दौरान सुनीता उरांव आम के बगीचे में मौजूद थी. इसी दौरान वज्रपात होने से उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई. जिसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने उसके शव को गोबर के गड्ढे में गाड़कर उसे जिंदा करने की कोशिश की. जब काफी देर तक महिला के शव में कोई हरकत नहीं हुई, तो इसकी सूचना ग्रामीणों ने पंचायत के मुखिया कुलदीप उरांव और भंडरा थाने को दी. तब पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर भेज दिया.

अंधविश्वास में न पकड़कर कराएं इलाज- डॉक्टर 



भंडरा प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. निरुपमा टोपनो का कहना है कि ग्रामीण अंधविश्वास से ऊपर उठकर इलाज पर भरोसा करें. वज्रपात से मौत के बाद गोबर का लेप लगाना या गोबर के गड्ढे में दफनाना नहीं चाहिए. इससे कुछ भी नहीं होता है. यदि कोई व्यक्ति वज्रपात की चपेट में आ गया है, तो उसे तत्काल इलाज के लिए अस्पताल लाना चाहिए. भंडरा थानाप्रभारी संत कुमार राय ने कहा कि लोगों ने अज्ञानतावश ऐसा किया. लोगों को ऐसी कही-सुनी बातों पर यकीन नहीं करना चाहिए.



रिपोर्ट- अदिति सिन्हा

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