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पलामू के इस स्वास्थ्य केंद्र भवन में दवा-इलाज नहीं, होती दारू-जुए की बात

पलामू के इस स्वास्थ्य केंद्र भवन में दवा-इलाज नहीं, होती दारू-जुए की बात

करोड़ों रुपए की लागत से बना सतबरवा का स्वास्थ्य केंद्र भवन अब जुए का अड्डा बन गया है.

करोड़ों रुपए की लागत से बना सतबरवा का स्वास्थ्य केंद्र भवन अब जुए का अड्डा बन गया है.

झारखंड में आम लोगों को बेहतर स्वास्थ की सुविधा मिले इस उद्देश्य से सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था नाम पर करोड़ों रुपए पैसा पानी की तरह बहा रही है. मगर पैसों का कैसे दुरुपयोग हो रहा है इसका ताजा उदाहरण है करोड़ों रुपए की लागत से बने सतबरवा का स्वास्थ्य केंद्र भवन. जिस भवन में दवा और इलाज होनी चाहिए थी, वह जुआ और दारू का ठिकाना बनता जा रहा है.

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झारखंड में आम लोगों को बेहतर स्वास्थ की सुविधा मिले, इस उद्देश्य से सरकार करोड़ों रुपए  पानी की तरह बहा रही है. मगर पैसों का कैसे दुरुपयोग हो रहा है इसका ताजा उदाहरण है करोड़ों रुपए की लागत से बने सतबरवा का स्वास्थ्य केंद्र भवन. जिस भवन में दवा और इलाज होनी चाहिए थी, वह जुआ और दारू का ठिकाना बनता जा रहा है.

क्या है मामला

पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड के स्वास्थ्य केंद्र के नए भवनकी आधारशिला तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री भानु प्रताप शाही ने रखी थी. भवन निर्माण के कई साल बीत गए, मगर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण अभी तक इस अस्पताल का संचालन नहीं किया जा रहा है. इससे ग्रामीणों में  नाराजगी है.आलम यह है कि करोड़ों की लागत से बना यह भवन बिना इस्तेमाल जर्जर हो रहा है तो सही इलाज व्यवस्था नहीं होने से सतबरवा के लोग आज भी बीमार पड़ने पर जड़ी बूटी और झाड़ फूंक से इलाज के भरोसे हैं.

असामाजिक तत्वों का अड्डा

अस्पताल के कैंपस में झाड़ियों का अंबार है. ग्रामीणों का कहना है कि  नेक ख्याल से बना यह भवन असामाजिक तत्वों के नाम होता जा रहा है. लोगों के लिए अब यह जुए का अड्डा बन गया है.  लोग यहां शराब पीते हैं और अड्डा जमाते हैं. स्थानीय कहते हैं कि काफी उम्मीद थी कि अस्पताल का संचालन होगा तो लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिलेगी. मगर वर्षों इंतजार के बाद भी मायूसी है. पूर्व मंत्री ‌सह कांग्रेस नेता केएन त्रिपाठी का कहना है कि यह रघुवर दास की सरकार में जो भी मंत्री हैं, वे डिफॉल्ट टीम के मंत्री हैं. यही कारण है कि स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले के गृह जिले में करोड़ों की लागत से बना अस्पताल अब तक चालू नहीं हो सका है.

बहरहाल, भवन के अस्पताल में तब्दील होने में विलंब का कारण जो भी रहा हो, मगर कहीं ना कहीं सरकार के पैसे का दुरुपयोग साफ दिखाई दे रहा है. सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर इसके लिए जिम्मेवार कौन है और सरकार वैसे लोगों को चिन्हित कर कार्रवाई क्यों नहीं करती. (पलामू से नील कमल की रिपोर्ट)

 

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