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रांची: धान खरीद केंद्र में MSP पर नहीं बिक रहा धान, औने-पौने दामों में बिचौलिया के हाथों बेंचने को मजबूर हैं किसान

झारखंड में मंडियों में धान की खरीद नहीं हो रही है. एसे में किसान बिचौलियों को औने-पाने दाम पर बेंचने को मजबूर हैं.
झारखंड में मंडियों में धान की खरीद नहीं हो रही है. एसे में किसान बिचौलियों को औने-पाने दाम पर बेंचने को मजबूर हैं.

रांची (Ranchi) की मंडियों में धान (Paddy) की खरीद नहीं हो रही है. इसके चलते किसान (Farmer) औने-पौने दामों पर बिचौलियों को धान बेंचने के लिए मजबूर हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2021, 4:13 PM IST
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रांची. अन्य वर्षों की तरह इस बार भी राज्य में सरकारी दर पर एक दिसंबर से धान की खरीद शुरू की गई. किसानों (Farmer) के लिए राज्य के हर प्रखंड में स्थित लैम्स में धान खरीद केन्द्र (Paddy Purchase Center) बनाया गया है, जहां किसान धान बेच सकते हैं. लेकिन इन लैम्स की हालात यह है कि यहां किसानों की धान खरीद बंद हो चुकी है. 13 जनवरी तक राज्य भर में लक्ष्य का महज 18 फीसद धान ही किसानों से सरकार एमएसपी (MSP) पर खरीद सकी है.

राज्य सरकार ने फरवरी तक धान क्रय का लक्ष्य तय किया है. मौजूदा स्थिति को देखते हुए सहज ही यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगले डेढ़ माह के नतीजे क्या होंगे. लैम्स के द्वारा हो रहे धान खरीद का जब न्यूज 18 की टीम ने जाययी लिया तो यहां रजिस्टर्ड 298 किसान में से मात्र 40 ने ही धान बेचा है, वो भी लक्ष्य से काफी कम दाम पर. इसके पीछे का वजह रख रखाव के अभाव में धान खरीद का बंद होना बताया जा रहा है.

ऐसी ही स्थिति अन्य लैम्स की भी है, जहां धान खरीद केन्द्र पर धान नहीं खरीदा जा रहा है. किसान परेशान हैं और हर दिन लैम्स का चक्कर ला रहे हैं. धान खरीद नहीं होने के पीछे का कारण अधिकारी गोदाम में पड़े धान का मिल मालिकों द्वारा उठाव नहीं होने को मुख्य वजह बता रहे हैं.



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मिल मालिक को गोदाम में पड़े धान का उठाव करने से पहले सरकार को बदले में 68 फीसदी चावल देना है. उधर धान खरीद बंद होने के कारण किसान बेहद ही परेशान हैं. गांव में बिचौलिये हावी हैं और किसानों को औने-पौने दामों में धान बेचने के लिए मजबूर कर रहे हैं. खिजड़ी गांव में जब न्यूज 18 की टीम किसानों के घर पहुंची तो महिला किसान ने अपनी परेशानी को कुछ इस तरह से बताई.

केंद्र सरकार द्वारा तय एमएसपी के अलावा राज्य सरकार प्रति क्विंटल 182 रुपये का बोनस भी दे रही है. किसानों से 2050 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जाना था, लेकिन ज्यादातर किसान इस मूल्य से वंचित हैं. अब तक की धान खरीद की दिशा में किए गए प्रयासों पर गौर करें, तो पता चलता है कि धान खरीद के लिए राज्य में 1.79 लाख किसानों का रजिस्ट्रेशन किया गया था. इसकी जगह 13 जनवरी तक महज 15,425 किसानों से ही धान क्रय किया गया है. जाहिर है रजिस्टर्ड किसानों में से महज 8.5 फीसद किसानों से ही अब तक धान खरीदा गया है. 90 फीसद से ज्यादा रजिस्टर्ड किसान सरकार की इस योजना से अब भी वंचित हैं.
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