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इसे कहते हैं सरकारी तंत्र! 217 करोड़ की योजना फेल, पानी के लिए नाले से काम चला रहे ग्रामीण

इसे कहते हैं सरकारी तंत्र! 217 करोड़ की योजना फेल, पानी के लिए नाले से काम चला रहे ग्रामीण

पाकुड़ के लिट्टीपाड़ा प्रखंड की ये तस्वीर सरकारी तंत्र पर बड़े सवाल खड़ी कर रही है.

पाकुड़ के लिट्टीपाड़ा प्रखंड की ये तस्वीर सरकारी तंत्र पर बड़े सवाल खड़ी कर रही है.

Pakur News: लिट्टपाड़ा प्रखंड के पश्चिमी क्षेत्र के कुंजबोना, कर्माटार, जोड़डीहा पंचायतों के दर्जनों गांव के लोग आज भी झरने, नाला और नदी का पानी पीते है. दूषित पानी पीकर यहां के लोग बीमार पड़ रह हैं. लोगों को 217 करोड़ की इस योजना के चालू होने से उम्मीद थी. उम्मीद थी कि अब उन्हें शुद्ध पानी मिलेगा. लेकिन 5 वर्ष बीत जाने के बावजूद योजना अधूरी पड़ी हुई है.

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    रिपोर्ट- नंद किशोर मंडल
    पाकुड़. झारखंड में जल, जंगल और जमीन का नारा देने वाले आदिवासियों को जंगल और जमीन से विस्थापित किया ही जा रहा है, अब उन्हें शुद्ध जल से भी महरूम रखा जा रहा है. सरकार एक ओर ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कई योजना के क्रियान्वयन का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर कई गांव के ग्रामीण आज भी लंबी दूरी तय कर नदी का गंदा पानी पीने को विवश हैं. पाकुड़ के लिट्टीपाड़ा प्रखंड क्षेत्र में बहु जलापूर्ति योजना 5 वर्ष बीत जाने के बावजूद चालू नहीं हो पाई है. 217 करोड़ की इस योजना को तत्कालीन रघुवर सरकार ने स्वीकृति दी गई थी.

    लिट्टपाड़ा प्रखंड के पश्चिमी क्षेत्र के कुंजबोना, कर्माटार, जोड़डीहा पंचायतों के दर्जनों गांव के लोग आज भी झरने, नाला और नदी का पानी पीते है. दूषित पानी पीकर यहां के लोग बीमार पड़ रह हैं. लोगों को 217 करोड़ की इस योजना के चालू होने से उम्मीद थी. उम्मीद थी कि अब उन्हें शुद्ध पानी मिलेगा. लेकिन 5 वर्ष बीत जाने के बावजूद योजना अधूरी पड़ी हुई है.

    217 करोड़ की जलापूर्ति योजना से प्रखंड के 304 गांव के 105701 लोगों को शुद्ध पेयजल मिलेगा. बता दें कि लिट्टीपाड़ा प्रखंड मुख्यालय से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर बसा मालिपाड़ा गांव के ग्रामीण नदी से पानी लाकर पीने को मजबूर हैं. हालत यह है कि मुख्य सड़क से इस गांव तक पहुंचने के लिए न कोई कच्ची सड़क है  और न ही पक्की. गांव में दो टोले हैं. 105 घर में 564 लोग रहते हैं. ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों से पानी की समस्या को दूर करने के लिए मिन्नतें की, लेकिन कोई असर नहीं हुआ.

    ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ चुनाव के समय ही जनप्रतिनिधि आते हैं. उसके बाद उनका दर्शन भी नहीं होता है. जन प्रतिनिधि, प्रशासन कोई भी हम ग्रामीणों को देखने नही आते हैं. हमें पानी जैसी मूलभूत सुविधा भी नहीं मिल रही है.

    Tags: Jharkhand news, Pakur news

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