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उड़ती धूल के बीच पढ़ने को मजबूर बच्चें

उड़ती धूल के बीच पढ़ने को मजबूर बच्चें
उड़ती धूल के बीच पढ़ने को मजबूर बच्चें

विद्यालय में 80 बच्चों का नामांकन है लेकिन 40 बच्चें ही आते हैं. माता पिता धूल की वजह से बच्चों को विद्यालय नहीं भेजते हैं.

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पाकुड़ जिले के पाकुड़िया प्रखंड़ में एक स्कूल धूल में चल रहा है. और इसी धूल में बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं. हर दिन कोई एक विषय उन्हे परेशान करता है तो वह है उड़ता हुआ धूल.

पाकुड़िया के गोलपुर मध्य विद्यालय के छात्र छात्रा पत्थर के धूल के बीच अपनी पढ़ाई करते हैं. क्लास रुम से लेकर स्कूल परिसर पत्थर के धूल से भरा रहता है. विद्यालय में 80 बच्चों का नामांकन है लेकिन 40 बच्चें ही आते हैं. माता पिता धूल की वजह से बच्चों को विद्यालय नहीं भेजते हैं.

बताया जा रहा है कि बड़े-बड़े वाहनों का चलना जैसे पत्थरों से लदा हुआ ट्रक, डंफर का चलना इसकी सबसे बड़ी वजह है. उड़ता हुआ धूल पूरे स्कूल परिसर में उड़ता है और उसी के बीच बच्चे पढ़ते हैं.



पत्थर धूल से निजात पाने के लिए हर दिन छात्र छात्राएं स्कूल परिसर में पानी का छिड़काव करते हैं ताकि पत्थर के धूल से बचा जा सके. बच्चे अपना भविष्य संवारने विद्यालय आते हैं लेकिन धूल की वजह से उनकी पढ़ाई सही ठंग से नहीं हो पाती है.
विद्यालय के शिक्षिका का कहना है कि पत्थर व्यवसायियों को पथ में पानी छिड़कने को कहा गया है लेकिन कोई सुनता ही नहीं है. हर दिन उड़ते धूल से शिक्षक सहित बच्चे परेशान हैं. ऐसे उड़ते हुए धूल में पढ़ने से बच्चों पर क्या असर पड़ेगा सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है.
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