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झारखंड के किसानों के लिए कोयला बना काल, इस वजह से ग्रामीणों के जीवन पर पड़ रहा बुरा असर

झारखंड के किसानों के लिए कोयला बना काल, इस वजह से ग्रामीणों के जीवन पर पड़ रहा बुरा असर

कोयले की डस्ट से खेत में लगी फसल भी बर्बाद हो रही है.

कोयले की डस्ट से खेत में लगी फसल भी बर्बाद हो रही है.

Jharkhand News: झारखंड के पाकुड़ जिले के पचुवाड़ा कोल माइंस अलुबेड़ा से बीजीआर कंपनी द्वारा कोयला परिवहन कर पाकुड़ रेलवे साइडिंग तक लाया जाता है लेकिन आस-पास रहने वाले ग्रामीणों के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है. पचूवाड़ा कॉल ब्लॉक से लाया जा रहा कोयला ग्रामीणों के जीवन पर विपरीत असर डाल रहा है, जिसको लेकर ग्रामीण और किसान काफी परेशान हैं. बता दें कि कोलाजोड़ा पंचायत के बरहाबाद मौजा स्थित सड़क किनारे लगाई गई धान की फसल कोयले के उड़ते डस्ट से बर्बाद हो रही है. 

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    रिपोर्ट – नंदकिशोर मंडल

    पाकुड़. झारखंड के पाकुड़ जिले के पचुवाड़ा कोल माइंस अलुबेड़ा से बीजीआर कंपनी द्वारा कोयला परिवहन कर पाकुड़ रेलवे साइडिंग तक लाया जाता है, लेकिन आस-पास रहने वाले ग्रामीणों के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है. पचूवाड़ा कॉल ब्लॉक से लाया जा रहा कोयला ग्रामीणों के जीवन पर विपरीत असर डाल रहा है. जिसको लेकर ग्रामीण और किसान काफी परेशान हैं. आपको बता दें कि कोलाजोड़ा पंचायत के बरहाबाद मौजा स्थित सड़क किनारे लगाई गई धान की फसल कोयले के उड़ते डस्ट से बर्बाद हो रही है. फसल नष्ट होने से फसल की अच्छी पैदावार नहीं हो रही है.

    बीजीआर कंपनी नियमों को ताक में रखकर कोयला रेक पॉइट से मशीनों और ट्रकों के माध्यम से पहुंचता है. ट्रकों में लोड कोयला बिना किसी सुरक्षा इंतजामों के साथ पाकुड़ पेनम कॉल साइडिंग में डम्प किया जाता है. जब कोयला रेक पॉइंट से मशीनों से ट्रकों में कोयला लोड किया जाता है, तो कोयले की डस्ट उड़ती है. लोडिंग के बाद कोयले से भरे ट्रक सड़कों पर दौड़ते हैं, तो उनसे निकलने वाली कोयले की डस्ट इलाके के तालाब कुएं और अन्य पानी के स्रोतों को दूषित कर रही है.

    कोयले की डस्ट से खेत में लगी फसल भी बर्बाद हो रही है. इसके अलावा हवा में हर वक्त कोयले की डस्ट मौजूद रहती है, जिससे कारण स्थानीय लोग तरह-तरह की बीमारी का शिकार हो रहे हैं. ट्रकों से निकलने वाले कोयले की डस्ट का असर आस-पास के गांव जैसे पोखरिया, शहर ग्राम, कोलाजोड़ा, सिलकुटी समेत कई गांव प्रभावित हो रहे हैं.

    ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले में यदि हम किसानों को अगर क्षतिपूर्ति नहीं दी गई, तो ग्रामीण इसको लेकर ग्रामीण कंपनी के खिलाफ विरोध करने को बाध्य होंगे. ग्रामीण अल्फ्रेड मुर्मू ने बताया कि हाइवा में बिना ढ़के कोयला लाया जाता है, जबकि नियम त्रिपाल से ढक कर लाने का है बिना ढंके लाने से कोयला का धूल खेत में जाकर गिर रहा है, जिससे खेत में लगी फसल को काफी क्षति पहुंच रही है.

    वहीं किसानों ने बताया कि खेत में लगी फसल हर साल बर्बाद हो रही है. जिस उम्मीद से खेत में फसल लगाते ही उड़ते धूल के कारण नहीं हो रही है. इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन से कर चुके हैं, लेकिन आज तक उनकी समस्या को दूर करने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए. ग्रामीणों ने बताया कि कोयले की डस्ट की समस्या दिन प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है.

    Tags: Coal mines, Jharkhand news, Paddy crop

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