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गोद लिये हुए गांव की तस्वीर बदल रहे हैं डीसी

गोद लिये हुए गांव की तकदीर बदल रहे हैं डीसी

गोद लिये हुए गांव की तकदीर बदल रहे हैं डीसी

डीसी दिलीप कुमार झा पहाड़िया जनजाति और आदिवासियों की पांच सौ आबादी वाले इस गांव की तकदीर और तस्वीर बदलने में जुट हुये हैं

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सरकार विकास के वादे को पूरा करने के लिए तमाम तरह के कदम उठा रही है. आदिम जनजाति पहाड़िया और उनके गांवों की विकास के लिए पदाधिकारियों को गोद लेने का निर्देश दिया गया है. इसी निर्देश के तहत लिट्टीपाड़ा के मुकरी पहाड गांव को डीसी ने गोद लिया है.

पाकुड़ के मुकरी पहाड गांव चौतरफा समस्याओं से जूझ रहा था. ग्रामीणओं को पीने का पानी, स्वास्थ्य सेवा, बिजली, सड़क, रोजगार कुछ भी उपलब्ध नहीं था. ग्रामीण जंगल से लाए हुए सुखी लकड़ी और पत्ते के प्लेट बेचकर दो वक्त की रोटी का उपार्जन कर पाते थे. पहाड़िया जनजाति के इनलोगों की थाली से दाल,सब्जी लगभग गायब रहते थे. लेकिन अब सरकार की पहल पर मुकरी पहाड़ गांव का चौतरफा विकास शुरू हो गया है.

डीसी दिलीप कुमार झा पहाड़िया जनजाति और आदिवासियों की पांच सौ आबादी वाले इस गांव की तकदीर और तस्वीर बदलने में जुट हुये हैं. डीसी की पहल पर चिकित्सक अब गांव जाकर ग्रामीणों को इलाज मुहैया कराते हैं. आंगनबाड़ी केन्द्र को दुरुस्त किया गया है. गांव के अंदर और मुख्य पथ से गांव तक की सड़क बनवायी गयी है. शेष योजना मार्च तक पूरा करने का निर्देश डीसी ने दिया है.



इतना ही नहीं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी कदम उठाये गये हैं. गांव की 31 महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण देकर स्वाबलंबी बनाने का प्रयास किया जा रहा है. गांव के 18 से 35 साल के युवकों को कौशल विकास के तहत प्रशिक्षण देकर नौकरी देने की भी तैयारी है.
 
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