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इस परि‍वार को नहीं मिली मदद, तो जल्‍द अनाथ हो जाएंगे ये चार मासूम

Kundan Kumar | News18 Jharkhand
Updated: September 9, 2018, 1:28 PM IST
इस परि‍वार को नहीं मिली मदद, तो जल्‍द अनाथ हो जाएंगे ये चार मासूम
पूरे पैर में लगे स्‍टील के कीलों के साथ बीरि‍सिंह बास्‍की और उसके बच्‍चे.

इस परिवार को मदद की जरूरत है. अगर मदद नहीं मिली तो पूरा परिवार तिनके की तरह बिखर जाएगा. बच्चों को उनका जीवन न जाने किस दिशा में बहाकर ले जाएगा.

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झारखंड के पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा के गोहंडा गांव में एक परिवार बिखर कर बर्बाद होने के डेंजर जोन में पहुंंच चुका है. ये बीरसिंह बास्की का परि‍वार है. बीरसिंह बास्की जिन्दगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है. उसके दाहिने पैर में नीचे से ऊपर तक स्टील की कीलें लगी हुई हैं. पैर कब तक ठीक होगा और कीले कब निकलेंगी, मालूम नहीं. परिवार की माली हालत इतनी खराब है कि डॉक्टर से इलाज करा नहीं सकते. बिना पैसे के जड़ी-बूटी के सहारे इलाज चल रहा है.

पैसे नहीं थे, इलाज के बिना लौटा घर
बीरसिंह बास्की का गत 10 अप्रैल को एक्सीडेंट हो गया था. इसके बाद उसका इलाज पाकुड़ के सदर अस्पताल में कराने के बाद उसे पश्चिम बंगाल के बरहमपुर भेज दिया गया. वहां इलाज होने के बाद उसे कोलकाता भेजा गया. वहां वह भर्ती नहीं हो सका और इलाज भी नहीं हुआ. वापस बरहमपुर आने के बाद उससे इलाज के लिए पैसे की मांग की गई. पैसे नहीं होने की स्थिति में वह घर आ गया और अब भगवान भरोसे जड़ी-बूटी से इलाज करवा रहा है. उसका पूरा पैर फूला हुआ है. शरीर पीला होते जा रहा है. बच्‍चे बिस्‍तर पर ही उसे नित्‍यकर्म करवाकर फेंकते हैं. इलाज के लिए तो दूर, परि‍वार में खाने के लिए भी पैसे नहीं हैं.

बीरसिंह की झोपड़ी.


एक्‍सीडेंट के सदमे में चल बसी पत्‍नी
दुर्घटना के बाद पत्नी सदमे में आकर उस समय दुनिया छोड़कर चली गई जब बीरसिंह बास्की पश्चिम बंगाल के नर्सिंग होम में भर्ती था. बीरसिंह पत्नी को अंतिम विदाई भी नहीं दे सका. घर में बीरसिंह बास्की और उसकी मां हैं. पिता का दस वर्ष पूर्व देहांत हो चुका है. बीरसिंह बास्की के चार बच्चे हैं. सबसे बड़ी बेटी है. सबसे छोटा बेटा खाने के अभाव में कुपोषण का शिकार हो चुका है. वो भी जिन्दगी और मौत की जंग लड़ रहा है. मां के दुनिया से चले जाने के बाद दादी के सीने का अमृत पीने की कोशिश दुनिया में जीने की जगह बनाने की अंतहीन जद्दोजहद कर रहा है. दादी उसको लेकर दर-दर भटक रही है.

पांच लोगों का परिवार, महीने का केवल 10  किलो अनाज परिवार वालों को सहायता के नाम पर सरकारी अनाज मिल रहा है. दस किलो अनाज में आधा आधा पेट खाकर पूरा महीना खाना खाने का प्रयास पूरा परिवार करता है. दया के पात्र बने बच्चों को कभी कभार गांव वाले खाना देते हैं. गांव वाले भी सहायता करने से पीछे हट रहे हैं, क्योंकि गांव के अधिकांश लोग मेहनत-मजदूरी करके अपना जीवन यापन करते हैं.

मां के नाम पर मंजूर हुआ है पीएम आवास
बीरसिंह बास्की का घर भी टूटने के कगार पर है. घर बारिश को नहीं झेल पा रहा है. टाटी और मिट्टी से बनाए गए घर को एक पेड़ सुरक्षा दे रहा है. घर के नाम पर सरकार से पीएम आवास मिला है, लेकिन सवाल होता है कि जिसके खाने और इलाज कराने के लिए पैसे नहीं हैं, वह आवास लेकर क्या करेंगा. फिर भी पदाधिकारियों के दबाव में आवास निर्माण के लिए फाउंडेशन किया जा रहा है. पीएम आवास बीरसिंह बास्की के मां के नाम पर मिला है.

बीरसिंह की सबसे बड़ी बेटी जो स्‍कूल से अपना मिड डे मील लाकर पिता और छोटे भाइयों को खिलाती है.


बेटी स्‍कूल से लाकर खिलाती है अपना मिड डे मील
दुर्घटना के बाद क्या खेल हुआ है, यह तो सरकारी कागज में दर्ज है. दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी वाले ने उसे चंद रुपए देकर अपना पीछा छुड़ा लिया. चार महीने बीत जाने के बाद आज तक कोई बीरसिंह बास्की को देखने नहीं आया है. बीरसिंह बास्की की बड़ी बेटी नेहा बास्की स्कूल जाती है और अपने हिस्से का मिड डे मील घर लाकर पिता और छोटे भाइयों को खिलाती है.

कुपोषण का शिकार सबसे छोटा बच्‍चा दादी की गोद में.


छोटा बेटा भी जा रहा है मौत के करीब
बीरसिंह बास्की को यह चिंता सता रही है कि उसका सबसे छोटा बच्चा नहीं बचेगा, क्योंकि खाने के अभाव में वह मौत के करीब जा रहा है. वह पूरी तरह से कुपोषण के जाल में घि‍र चुका है. बीरसिंह बास्की की स्थिति भी दिनोदिन खराब होती जा रही है. अगर वह खुद काल के गाल में समा गया तो चार बच्चे अनाथ हो जाएंगे. दादी भी उम्र के अंतिम पड़ाव में है. ऐसे में चार बच्चों को क्या होगा, कौन बच्चों को सही दिशा देगा या फिर इन बच्चों का जीवन नर्क हो जाएगा, यह चिंता बीरसिंह बास्की को अंदर से खोखला करती जा रही है.

जिम्‍मेदार नहीं ले रहे कोई संज्ञान
इस परिवार को मदद की जरूरत है. अगर मदद नहीं मिली तो पूरा परिवार तिनके की तरह बिखर जाएगा. बच्चों को उनका जीवन न जाने किस दिशा में बहाकर ले जाएगा. मामले की जानकारी एसडीओ जितेन्द्र देव को जब न्यूज18 के माध्यम से मिली तो उन्‍होंने बीरसिंह बास्‍की का इलाज करवाने का आश्वसन दिया है. क्षेत्र के विधायक, सांसद, जिला प्रशासन के पदाधिकारी कोई संज्ञान नहीं ले रहे हैं, जबकि वाकया सभी को मालूम है. पूरा परिवार और पड़ोसी जिला प्रशासन और सीएम से मदद की गुहार लगा रहे हैं.

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First published: September 9, 2018, 12:57 PM IST
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