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डाकिया योजना में गड़बड़झाला, एक महीने के बदले 4 महीने पर मिलता है अनाज

लाभुकों को नहीं मिल रहा डाकिया योजना का लाभ
लाभुकों को नहीं मिल रहा डाकिया योजना का लाभ

पाकुड़ में पहाड़िया समुदाय के लोगों को तीन- चार महीने में एक बार डाकिया योजना के तहत अनाज मिलता है. वह भी सिर्फ एक महीने का, जबकि हर महीने अनाज मिलना चाहिए.

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झारखंड के पाकुड़ में डाकिया योजना का हाल बेहाल हो चुका है. राज्य सरकार ने आदिम जनजाति पहाड़िया समुदाय के लिए डाकिया योजना लागू की है. लेकिन पदाधिकारियों की लापरवाही के कारण योजना का लाभ पहाड़िया समुदाय के लोगों को नहीं मिल पा रहा है.

जिले के पाकुड़िया प्रखंड में पहाड़िया समुदाय के लोगों को तीन- चार महीने में एक बार डाकिया योजना के तहत अनाज मिलता है. वह भी सिर्फ एक महीने का अनाज. जबकि हर महीने अनाज मिलना चाहिए. लाभुकों के मुताबिक पदाधिकारियों की लापरवाही के कारण उन्हें चार महीने पर अनाज मिलता है. उसे भी माथे पर ढोकर घऱ ले जाना पड़ता है, जबकि नियम के अनुसार डीलर को घर पहुंचाना चाहिए.

पाकुड़िया प्रखंड की आबादी लगभग दो लाख है. इसमें डाकिया योजना के लाभुक 391 परिवार हैं. पाकुड़िया के माड़गांव, सोगले, हाकीमपुर, छोटा उदलबानी गांव के लाभुकों के अनुसार चार माह में एक बार 35 किलो चावल मिलता है. डीलरों का कहना है कि ट्रॉन्सपोर्टर की लापरवाही के कारण अनाज लाभुकों को नहीं मिलता है. पाकुड़ के एसडीओ जितेन्द्र कुमार देव का कहना है कि अनाज नहीं मिल रहा है तो डीलरों पर कार्रवाई होगी.



दरअसल ट्रांसपोर्टर और डीलर की मिलीभगत से लाभुकों को परेशानी होती है. ट्रांसपोर्टर डीलर के घर पर अनाज पहुंचा देता है और डीलर लाभुकों को अपने घर बुलाकर अनाज बांटता है. वह भी एक महीने के बदले चार महीने पर, बीच के दो महीने का अनाज कहां जाता है किसी को पता नहीं.
(रिपोर्ट- कुन्दन कुमार)

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