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क्या वाकई झारखंड का पाकुड़ जिला हो गया है नक्सल मुक्त? जानें जमीनी सच्चाई

फाइल फोटो
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पाकुड़ में नक्सली गतिविधि की शुरुआत कोल ब्लॉक खुलने के साथ हुई

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गृह मंत्रालय ने झारखंड के दो जिले पाकुड़ और दे‌वघर को नक्सलमुक्त घोषित कर दिया है. लेकिन क्या वाकई पाकुड़ नक्सलमुक्त बन चुका है? इसकी पड़ताल न्यूज-18 ने जब जमीन पर जाकर की, तो कुछ इस तरह की सच्चाई सामने आई.

पाकुड़ जिले में छह प्रखंड हैं, पाकुड़, लिटटीपाड़ा,अमड़ापाड़ा, महेशपुर और पाकुड़िया. इन छह प्रखंड में मुख्य रूप से अमड़ापाड़ा और लिटटीपाड़ा को नक्सल प्रभावित माना जाता है. अमरापाड़ा के आलूबेड़ा और पचुवाड़ा पंचायत सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित रहा है.

कोल ब्लॉक खुलने के साथ शुरू हुई थी नक्सली गतिविधि



पाकुड़ में नक्सली गतिविधि की शुरुआत कोल ब्लॉक खुलने के साथ हुई. वर्ष 2000 में कोल ब्लॉक खुलने की सुगबुगाहट हुई, तो उसी समय से जिले में नक्सलियों के आने-जाने, बैठक करने की सूचना पुलिस को मिलने लगी. इसके बाद 2002 के आसपास आलूबेड़ा में डम्फर में आग लगाने की घटना सामने आई.  पुलिस ने जांच में इस घटना में नक्सलियों के हाथ होने का पहली बार खुलासा किया.
कोयला उत्खनन के साथ बढ़ी नक्सली वारदात 

जिले में जैसे-जैसे कोयला उत्खनन तेज होता गया, नक्सली वारदात भी बढ़ती गई. अमड़ापाड़ा थाना क्षेत्र में नक्सलियों ने सबसे ज्यादा तांडव मचाया. जिनमें मुख्य रूप से 26 डम्फर में आग लगाना, सिस्टर वालसा हत्याकांड, पैनम डायरेक्टर डी शरण की हत्या, कोयला उत्खनन क्षेत्र में पैनम कोल माइंस के अंदर पुलिस कैंप में हमला, पैनम कोल माइंस के निजी सुरक्षा कर्मी की गोली मार कर हत्या, पैनम कोल लिंक रोड में लैंड माइंस लगाना, पैनम कोल लिंक रोड में सिंहवाहिनी मंदिर के सामने पांच डम्फर में आग लगाना सहित अन्य छोटी-बडी घटनाएं शामिल हैं. इन सभी वारदातों में घटनास्थल से पुलिस को नक्सली पोस्टर बरामद हुए.

नक्सलियों ने नाम पर अपराधियों ने पैदा किया भय 

तीन वर्ष पूर्व रांगा गांव में बन रहे पुल के कार्यालय में ब्लास्ट किया गया और मजदूरों के साथ मारपीट भी की गई. यहां से भी नक्सलियों को पोस्टर मिला. हालांकि पुलिस मानती है कि कई घटनाओं को अपराधियों ने अंजाम देकर नक्सली पोस्टर के माध्यम से इसे नक्सली घटना का रंग देने की कोशिश की. इसके पीछे भय पैदा कर लेवी वसूलने की मंशा थी.

एसपी अमरजीत बलिहार व सिस्टर वालसा हत्याकांड बड़ी घटनाएं

हालांकि पाकुड़िया, अमड़ापाड़ा के पत्थर खदानो में लगे क्रशर में आग लगाने की घटनाओं को पुलिस ने नक्सली घटना करार दिया. दूसरी कई घटनाओं की जांच के बाद भी पुलिस ने माना कि ये नक्सली वारदात हैं. जिले में जिस दो सबसे बड़ी घटनाओं को नक्सलियों ने अंजाम दिया, वे हैं एसपी अमरजीत बलिहार हत्याकांड, जो दुमका जिला के काठीकुंड थाना के जमनी गांव में घटी थी, दूसरा सिस्टर वालसा हत्याकांड, जो अमड़ापाड़ा थाना के पचुवाड़ा गांव में घटी थी.

कोयला खदान बंद होने के बाद से बंद है नक्सली वारदात 

बीते चार साल से पाकुड़ में कोयला खदान बंद है. उसके बाद से नक्सली वारदात भी यहां बंद है. लेकिन नक्सल प्रभावित इलाकों में अब भी नक्सलियों की बैठक, आने जाने की सूचना और गुप्तचर के भ्रमण की सूचना पुलिस को मिलती रहती है. पुलिस यह मानती है कि पाकुड़ के अमड़ापाड़ा और लिटटीपाड़ा प्रखंड में अभी भी नक्सलियों का प्रभाव है. इन थाना क्षेत्रों में नक्सलियों की गतिविधि जारी है.

आमलोगों की माने तो पाकुड़ जिले से नक्सलवाद खत्म हुआ है या नहीं इसको जानने के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा. दोबारा कोल ब्लॉक खुलने के बाद अगर नक्सली घटना सामने नहीं आई, तब ये माना जाएगा कि पाकुड़ जिला सचमूच नक्सलमुक्त हो गया है.

 
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