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सरस्वती पूजा की तैयारी जोरों पर, छात्र-छात्राएं उत्साहित

मूर्तिकारों को मूर्तियों के उचित दाम नहीं मिल रहे
मूर्तिकारों को मूर्तियों के उचित दाम नहीं मिल रहे

पाकुड़ में दो हजार से अधिक देवी सरस्वती की प्रतिमा बनाई गई है.

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पाकुड़ में सरस्वती पूजा की तैयारी जोर शोर से चल रही है. सबसे ज्यादा उत्साह स्कूल के बच्चों में देखने को मिल रहा है. स्कूल के बच्चे अपने शिक्षकों के साथ देवी सरस्वती की मूर्ति के साथ-साथ फल पूजा सामग्री की खरीददारी कर रहे हैं. मूर्तिकार से मूर्ति खरीदकर विद्यालय ले जाए जा रहे हैं. सरस्वती पूजा या कहिए बसंत पंचमी का त्योहार सोमवार 22 जनवरी को मनाया जाना है.

पाकुड़ में दो हजार से अधिक देवी सरस्वती की प्रतिमा बनाई गई है. पाकुड़ में बनाई गई प्रतिमा बिहार और बंगाल भी ले जाए जाते हैं. जिले के हर गांव की मूर्ति पाकुड़ शहर से ले जाया जाता है. मूर्तिकार पिछले दो माह से मूर्ति बनाने में लगे हुए हैं. ज्यादातर मूर्तिकार बंगाल से आकर पाकुड़ में मूर्ति बनाते हैं. सरकारी शिक्षण संस्थान, गैर सरकारी शिक्षण संस्थानों में सरस्वती पूजा की धूम देखी जा रही है.

छात्र-छात्राओं का कहना है कि वे सभी सरस्वती पूजा को लेकर काफी उत्सुक हैं. पिछले कई दिनों से वे इसकी तैयारियां कर रहे हैं. लेकिन जहां देवी सरस्वती की मूर्ति लेकर छात्र-छात्राएं खुश हैं वहीं मूर्तिकारों के चेहरों पर वह खुशी देखने को नहीं मिल रही है. दरअसल उन्हें मूर्तियों के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं. उनकी कमाई नहीं हो रही है. इस कारण मूर्तिकारों में मायूसी देखी जा रही है.



सरस्वती पूजा के अवसर पर शिक्षकों का कहना है कि देवी सरस्वती की पूजा करने से छात्र-छात्राओं में पढ़ाई करने की प्रवृति बढ़ती है और उनमें अच्छे संस्कार आते हैं. शिक्षक प्रदीप मालाकार ने कहा कि मां सरस्वती विद्या की देवी हैं. विद्या से ही सबकुछ होता है. जीवन का आधार विद्या ही है. विद्या से बच्चे संस्कारी बनते हैं.
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