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सूरजमुखी और कुसुम फूल की खेती किसानों के जीवन में बिखेर रही खुशबू

सूरजमुखी और कुसुम फूल की खेती किसानों के जीवन में बिखेर रही खुशबू
सूरजमुखी और कुसुम फूल की खेती किसानों के जीवन में बिखेर रही खुशबू

ईलामी पूर्वी टोला के किसानों की सूरजमुखी फूल और कुसुम फूल की खेती को देखकर आसपास के किसान भी इस खेती को लेकर प्रेरित हुए हैं.

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पाकुड़ के किसानों के जीवन में सूरजमुखी और कुसुम की फूल उनके जीवन में खुशबू बिखेर रही है. पाकुड़ में किसान कई एकड़ में सूरजमुखी और कुसुम फूल की खेती कर रहे हैं.

सरकार खेती में किसानों के साथ-साथ युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना चाहती है. पाकुड़ के ईलामी गांव के किसान बहुफसली खेती कर प्रेरणा स्त्रोत बन रहे है. कृषि विभाग ने किसानों को बीज और खाद उपलब्ध कराया था. कृषि विभाग की ओर से सूरजमुखी और कुसुम फूल की खेती के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया था और विशेष प्रशिक्षण के लिए किसानों को दिल्ली, नागपुर भेजा गया था की किस तरह खेत को तैयार करना है और खाद-पानी-बीज किस वक्त देना है.

किसानों ने जब पहलीबार सूरजमुखी फूल और कुसुम फूल की खेती की थी तो नुकसान का डर सता रहा था लेकिन अब खेतों में सूरजमुखी और कुसुम का फूल खिलते देख सारा भय दूर हो गया है. एक ही जमीन पर प्याज, लहसुन के साथ-साथ सूरजमुखी फूल और कुसुम फूल की खेती कर किसानों को इसका नजीजा भी मिलना शुरु हो गया है.



किसानों के मुताबिक इतनी ही जमीन पर दूसरे फसल से प्रति क्विंटल सात सौ से आठ सौ की कमाई होती थी. अब सूरजमुखी और कुसुम फूल की खेती से किसानों की आमदनी दुगुनी हो गई है. पश्चिम बंगाल में इसकी काफी मांग है.
ईलामी पूर्वी टोला के किसानों की सूरजमुखी फूल और कुसुम फूल की खेती को देखकर आसपास के किसान भी इस खेती को लेकर प्रेरित हुए हैं. सरकार के इस पहल से किसानों में काफी खुशी है.
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