500 लोगों की आबादी वाले इस गांव में पानी की भीषण समस्या

पाकुड़ जिले के अमरापाड़ा प्रखंड में जराकी पंचायत में 500 की आबादी वाले इस गांव में पानी की सबसे बड़ी समस्या है. बता दें कि इस गांव के आदिम जनजाति पहाड़िया ग्रामीण 200 साल एक पुराने कुएं के पानी पीने को मजबूर हैं.

Kundan Kumar | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: February 15, 2018, 5:10 PM IST
500 लोगों की आबादी वाले इस गांव में पानी की भीषण समस्या
500 लोगों की आबादी वाले इस गांव में पानी की भीषण समस्या
Kundan Kumar | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: February 15, 2018, 5:10 PM IST
झारखंड में पाकुड़ जिले के अमरापाड़ा प्रखंड में जराकी पंचायत का बोडो पहाड़ एक आदिम जनजाति पहाड़िया गांव है, जहां कुल 120 घर और 500 लोगों की आबादी है. इस गांव में चार टोला हैं, जिसमें बासतीटोला, करमाटोला, सिमरीडांगा टोला और पुनटोला शामिल है. ऐसे में इतनी आबादी वाले इस गांव में पानी की सबसे बड़ी समस्या है. बता दें कि इस गांव के आदिम जनजाति पहाड़िया ग्रामीण 200 साल एक पुराने कुएं के पानी पीने को मजबूर हैं.

मामले में ग्राम प्रधान जनार्धन पहाड़िया ने बताया कि यहां के ग्रामीण रातजग्गा कर बारी बारी से ग्रुप बनाकर कुएं पर जाकर पानी निकालते हैं. इनका कहना है कि फरवरी माह के खत्म होते ही गांव में पानी की समस्या बढ़ जाती है. फरवरी माह के अंतिम सप्ताह से जुलाई तक पानी की कठिनाइयों से यहां के ग्रामीणों को गुजरना पड़ता है. इस गांव में 2 हैंडपंप हैं, लेकिन अनुपयोगी हैं.

ग्रामीणों की मानें तो इस गांव में शौचालय नहीं है, इसलिए गांव की महिला और पुरुष दोनों खुले में शौच के लिए जाते हैं. फिर भी प्रशासन मोन धारण किए हुए है. उनका कहना है कि विभाग द्वारा शौचालय बन भी जाता है तो पानी की समस्या बनी रहेगी.

वहीं मार्च-अप्रैल के दिनों में पहाड़ के नीचे करीब 2 किलोमीटर दूर जाकर उन्हें पानी लाना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि पानी लाने में ही उनका सारा समय चला जाता है. उनका सारा समय पानी लाने में ही लग जाता है.

वहीं मामले में कई बार पेयजल स्वच्छता विभाग को आवेदन भी दिया गया, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. ग्रामीणों का कहना है कि लिट्टीपाड़ा उपचुनाव के दिनों में राज्य के समाज कल्याण मंत्री डॉ. लुईस मरांडी को चुनावी सभा के दौरान आवेदन दिया गया था. फिर भी पानी की समस्या का समाधान अब तक नहीं हो सका है.

आपको बता दें कि इस गांव में 40 प्रतिशत शिक्षित पुरुष और 10 फीसदी शिक्षित महिला हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक इस गांव में डीप बोरिंग नहीं होगा तब तक पानी की समस्या बनी रहेगी. लोगों की मानें तो पानी ऐसी भीषण समस्या है कि उनके साथ साथ मवेशियों को भी पीने के लिए पानी नहीं मिल पाता है.
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