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VIDEO : छात्र छात्राओं ने धरना देकर ओलचिकि लिपि को लागू करने का किया विरोध

Kundan Kumar | News18 Jharkhand
Updated: March 5, 2019, 10:58 PM IST
VIDEO : छात्र छात्राओं ने धरना देकर ओलचिकि लिपि को लागू करने का किया विरोध
पाकुड़ में केकेएम कॉलेज के महाविद्यालय छात्र संघ के छात्र-छात्राओं ने धरना देकर ओलचिकि लिपि को लागू करने का विरोध किया. आदिवासी छात्र छात्राओं ने सिद्दो कान्हु पार्क के निकट धरना दिया. छात्र-छात्राओं ने संथाली भाषा से ओलचिकि लिपि को हटाकर पुर्व की तरह संथाली लिपि को लागू करने और संथाली शिक्षक की नियुक्ति करने की मांग की. छात्र-छात्राओं ने कहा कि सरकार को आदिवासियों से ओलचिकी भाषा के प्रति एक राय लेना जरुरी था. सरकार बिना राय लिए ओलचिकी भाषा को लागू कर रही है जो गलत है. छात्र-छात्राओं ने बताया कि ओलचिकी भाषा उड़िया प्रभावित और अवैज्ञानिक है. ओलचिकी उड़िया की बुगड़ी संथाल की लिपि है. इसकी भाषा टेड़ी मेढ़ी और अशुद्ध है जबकि संथाली भाषा झारखंड़ के संथाल परगना की भाषा शुद्ध और सर्वश्रेष्ठ है. आदिवासियों के मनोभाव को जाने बगैर जबरन ओलचिकि भाषा लागू करना आदिवासियों के लिए कुठाराधात है. आदिवासी छात्र छात्रा देवनगरी लिपि में मैट्रिक से बीएड तक कर चुका है. उनके साथ न्याय नहीं होगा. सरकार को इस मसले पर पुनर्विचार करना चाहिए.

पाकुड़ में केकेएम कॉलेज के महाविद्यालय छात्र संघ के छात्र-छात्राओं ने धरना देकर ओलचिकि लिपि को लागू करने का विरोध किया. आदिवासी छात्र छात्राओं ने सिद्दो कान्हु पार्क के निकट धरना दिया. छात्र-छात्राओं ने संथाली भाषा से ओलचिकि लिपि को हटाकर पुर्व की तरह संथाली लिपि को लागू करने और संथाली शिक्षक की नियुक्ति करने की मांग की. छात्र-छात्राओं ने कहा कि सरकार को आदिवासियों से ओलचिकी भाषा के प्रति एक राय लेना जरुरी था. सरकार बिना राय लिए ओलचिकी भाषा को लागू कर रही है जो गलत है. छात्र-छात्राओं ने बताया कि ओलचिकी भाषा उड़िया प्रभावित और अवैज्ञानिक है. ओलचिकी उड़िया की बुगड़ी संथाल की लिपि है. इसकी भाषा टेड़ी मेढ़ी और अशुद्ध है जबकि संथाली भाषा झारखंड़ के संथाल परगना की भाषा शुद्ध और सर्वश्रेष्ठ है. आदिवासियों के मनोभाव को जाने बगैर जबरन ओलचिकि भाषा लागू करना आदिवासियों के लिए कुठाराधात है. आदिवासी छात्र छात्रा देवनगरी लिपि में मैट्रिक से बीएड तक कर चुका है. उनके साथ न्याय नहीं होगा. सरकार को इस मसले पर पुनर्विचार करना चाहिए.

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पाकुड़ में केकेएम कॉलेज के महाविद्यालय छात्र संघ के छात्र-छात्राओं ने धरना देकर ओलचिकि लिपि को लागू करने का विरोध किया. आदिवासी छात्र छात्राओं ने सिद्दो कान्हु पार्क के निकट धरना दिया. छात्र-छात्राओं ने संथाली भाषा से ओलचिकि लिपि को हटाकर पुर्व की तरह संथाली लिपि को लागू करने और संथाली शिक्षक की नियुक्ति करने की मांग की. छात्र-छात्राओं ने कहा कि सरकार को आदिवासियों से ओलचिकी भाषा के प्रति एक राय लेना जरुरी था. सरकार बिना राय लिए ओलचिकी भाषा को लागू कर रही है जो गलत है. छात्र-छात्राओं ने बताया कि ओलचिकी भाषा उड़िया प्रभावित और अवैज्ञानिक है. ओलचिकी उड़िया की बुगड़ी संथाल की लिपि है. इसकी भाषा टेड़ी मेढ़ी और अशुद्ध है जबकि संथाली भाषा झारखंड़ के संथाल परगना की भाषा शुद्ध और सर्वश्रेष्ठ है. आदिवासियों के मनोभाव को जाने बगैर जबरन ओलचिकि भाषा लागू करना आदिवासियों के लिए कुठाराधात है. आदिवासी छात्र छात्रा देवनगरी लिपि में मैट्रिक से बीएड तक कर चुका है. उनके साथ न्याय नहीं होगा. सरकार को इस मसले पर पुनर्विचार करना चाहिए.

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First published: March 5, 2019, 10:58 PM IST
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