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झारखंड के जंगल में जानवरों को लगी चटपटा चिप्स खाने की आदत, नहीं मिलने पर करते हैं हमला

झारखंड के जंगल में जानवरों को लगी चटपटा चिप्स खाने की आदत, नहीं मिलने पर करते हैं हमला

पलामू-लातेहार के जंगलों में चटपटा चिप्स के लिए लंगूर और बंदर इंतजार करते नजर आते हैं.

पलामू-लातेहार के जंगलों में चटपटा चिप्स के लिए लंगूर और बंदर इंतजार करते नजर आते हैं.

Jharkhand News: पलामू टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर कुमार आशुतोष ने बताया कि लोगों के द्वारा चिप्स या स्नैक्स खिलाने से जानवरों के लिए कई तरह के खतरे पैदा होते हैं. लंगूर और बंदर खाने की लालसा में सड़क किनारे घंटों बैठे रहते हैं. इससे उनके किसी वाहन की चपेट में आने का खतरा हमेशा बना रहता है. ऐसे भोजन से जानवरों के बाल उड़ने लगते हैं. उन्हें अन्य गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं.

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    रिपोर्ट- संजय कुमार भारती

    पलामू. पलामू और लातेहार के जंगलों में मौजूद लगभग 200 से अधिक बंदर और लंगूर फूड हैबिट में बदलाव के कारण खतरे में हैं. फूड हैबिट में बदलाव के कारण जानवर आक्रामक हो गये हैं. दरअसल सैलानियों और राहगीरों द्वारा इन जानवरों को खुद के मनोरंजन के लिए तेल और मसालेदार चिप्स-स्नैक्स दिए जाते हैं. इस तरह के भोजन से जानवरों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है. वन विभाग के द्वारा जागरूकता के लिए जगह-जगह पर इससे संबंधित बोर्ड लगाये गये हैं. इसमें साफ- साफ लोगों से अपील की गयी है कि वे जानवरों को अपना भोजन ना दें, उन्हें वन्य ही रहने दें. फिर भी लोग खुद के मनोरंजन के लिए जानवरों के प्राकृतिक खान-पान को प्रभावित कर रहे हैं.

    पलामू टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर कुमार आशुतोष ने बताया कि पलामू टाइगर रिजर्व के अंदर जानवरों को इस तरह का खाना खिलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है. लोगों की जागरूकता के लिए जगह-जगह बोर्ड भी लगाए गए हैं. उन्होंने बताया कि लोगों के द्वारा इस तरह का खाना खिलाने से जानवरों को कई तरह के खतरे पैदा होते हैं. लंगूर और बंदर खाने की लालसा में सड़क किनारे घंटों बैठे रहते हैं. इससे उनके किसी वाहन की चपेट में आने का खतरा हमेशा बना रहता है.

    पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मुकेश कुमार ने बताया कि अप्राकृतिक भोजन से जानवरों के बाल उड़ने लगते हैं. इसके साथ ही उनमें अन्य गंभीर बीमारियां भी फैल सकती हैं. जानवरों में मनुष्यों के द्वारा संक्रमण के जरिए वायरस जनित रोग भी आसानी से फैल सकते हैं. कोरोना जैसी घातक बीमारी भी मनुष्यों के जरिए जानवरों तक पहुंच रही है, जिसका एक मुख्य कारण पर्यटकों के द्वारा जानवरों को भोजन खिलाना है.

    टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर कुमार आशीष ने कहा कि पिछले पांच से छह सालों में बेतला नेशनल पार्क के बंदरों का व्यवहार बिल्कुल ही बदल गया है. लोगों के द्वारा लगाई गई खाने की लत के कारण बंदर अब छीना झपटी भी करने लगे हैं. कोविड लॉकडाउन के दौरान जब बेतला में टूरिस्ट न के बराबर थे, तब यहां के बंदर और लंगूर बाहरी भोजन के लिए बेचैन से दिखे. इस बेचैनी ने उन्हें आक्रामक बनने पर मजबूर कर दिया. पूरे लॉकडाउन के दौरान बेतला के बंदर और लंगूरों ने 10 से भी अधिक बार खाने को लेकर लोगों पर हमला किया. कई बार तो वन अधिकारियों पर भी जानवरों के द्वारा इस तरह के हमले हो चुके हैं.

    लातेहार के पतकी और नेतरहाट मार्ग पर लोग ज्यादा लापरवाही कर रहे हैं. लातेहार के पतकी पुलिस पिकेट के पास चिप्स और बिस्किट के पैकेट ज्यादा मात्रा में दिखाई देते हैं. इसके साथ ही पलामू के बेतला नेशनल पार्क में भी पर्यटक इसी तरह की लापरवाही करते दिखाई देते हैं. इससे आने वाले भविष्य में पर्यावरण में असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.

    Tags: Jharkhand news, Palamu news

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