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बकोरिया मुठभेड़: जांच के लिए सीबीआई ने तैयार की क्राइम सीन

News18 Jharkhand
Updated: July 4, 2019, 4:06 PM IST
बकोरिया मुठभेड़: जांच के लिए सीबीआई ने तैयार की क्राइम सीन
बकोरिया के भेलवाघाटी में घटनास्थल पर पहुंचकर तथाकथित मुठभेड़ का नाट्य रूपांतरण कर हर पहलुओं को समझने की कोशिश की. सीबीआई के अधिकारी और फोरेंसिक डायरेक्टर एनबी वर्धन दो दिनों तक घटनास्थल पर रहकर जांच- पड़ताल करेंगे.

बकोरिया के भेलवाघाटी में घटनास्थल पर पहुंचकर तथाकथित मुठभेड़ का नाट्य रूपांतरण कर हर पहलुओं को समझने की कोशिश की. सीबीआई के अधिकारी और फोरेंसिक डायरेक्टर एनबी वर्धन दो दिनों तक घटनास्थल पर रहकर जांच- पड़ताल करेंगे.

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चर्चित बकोरिया मुठभेड़ कांड की जांच के लिए सीबीआई की टीम पलामू पहुंच चुकी है. जांच अधिकारियों ने सतबरवा थाने में मुठभेड़ में बरामद स्कॉर्पियो की पड़ताल की. इसके बाद बकोरिया के भेलवाघाटी में घटनास्थल पर पहुंचकर तथाकथित मुठभेड़ का नाट्य रूपांतरण कर हर पहलुओं को समझने की कोशिश की. सीबीआई के अधिकारी और फोरेंसिक डायरेक्टर एनबी वर्धन दो दिनों तक घटनास्थल पर रहकर जांच- पड़ताल करेंगे.

तीन थानेदार से पूछताछ

इससे पहले बुधवार को टीम ने पलामू सर्किट हाउस में मनिका थाना के तत्कालीन थानेदार गुलाम रब्बानी, सतबरवा ओपी ने तत्कालीन प्रभारी मो रुस्तम और सदर थाना के तत्कालीन थानेदार हरीश पाठक का बयान लिया. टीम ने सतबरवा, पलामू और मनिका थाने से कई कागजातों की भी मांग की है. इसमें मुठभेड़ से पहले की स्टेशन डायरी, माओवादी गतिविधि की सूचना के संबंध में इंट्री और थाने में तैनात पुलिस पदाधिकारियों की एक माह की गतिविधि शामिल हैं.

अधिकारियों ने दबाव डालकर कराया हस्ताक्षर

सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में मो रुस्तम अपने बयान से पलट गये. उन्होंने पलामू सदर थाने के तत्कालीन थानाप्रभारी हरीश पाठक के बयान का समर्थन किया. सूत्रों के मुताबिक मो रुस्तम ने सीबीआई अधिकारियों को ये भी कहा कि उन्होंने खुद एफआईआर नहीं लिखी थी, बल्कि अधिकारियों ने लिखित एफआईआर पर दबाव डालकर उनसे हस्ताक्षर करवाए. हस्ताक्षर के कारण वह शिकायतकर्ता बन गये. बता दें कि इस मामले में पलामू सदर थाने के तत्कालीन थानेदार हरीश पाठक ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया था.

घटना वाले दिन क्या हुआ

8 जून 2015 को पलामू के बकोरिया में पुलिस मुठभेड़ में पांच नाबालिग समेत 12 लोगों की मौत हो गई थी. मुठभेड़ के बाद पलामू डीआईजी हेमंत टोप्पो, लातेहार के तत्कालीन एसपी अजय लिंडा, पलामू सदर थाना के प्रभारी हरीश पाठक ने मुठभेड़ पर सवाल उठाये थे. दरअसल मई 2015 में आईबी ने 14 नक्सलियों के मोबाइल लोकेशन को लातेहार जिले के बार्डर पर ट्रैप किया था. इसकी सूचना सीआरपीएफ को दी गई. सीआरपीएफ के कोबरा बटालियन ने ऑपरेशन शुरू किया. आठ जून की रात पलामू एसपी ने सतबरवा ओपी इंचार्ज को लातेहार- पलामू हाइवे पर नक्सलियों के होने की सूचना दी और कोबरा बटालियन को सहयोग करने का निर्देश दिया. मुठभेड़ हुई, जिसमें 12 लोगों को मार गिराया गया. देर रात पलामू आईजी, एसपी और एसपी लातेहार मौके पर पहुंचे. मौके से बारह शव और आठ हथियार मिले थे. पहले इस मामले की जांच सीआईडी ने की. लेकिन झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर ये मामला सीबीआई को हैंडओवर किया गया.
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इनपुट- नीलकमल व विकास

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First published: July 4, 2019, 4:02 PM IST
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