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झारखंड विधानसभा चुनाव 2019: डालटनगंज में जातीय समीकरण कभी हावी नहीं रहा

News18 Jharkhand
Updated: November 19, 2019, 12:35 PM IST
झारखंड विधानसभा चुनाव 2019: डालटनगंज में जातीय समीकरण कभी हावी नहीं रहा
डालटनगंज विधानसभा क्षेत्र से लगातार 6 बार इंदर सिंह नामधारी विधायक रहे

बीजेपी (BJP) के आलोक चौरसिया (Alok Chaurasia) को टक्कर देने के लिए गठबंधन ने चुनावी मैदान में पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता केएन त्रिपाठी (KN Tripathi) को मैदान में उतारा है. वहीं जेवीएम प्रत्याशी डॉ. राहुल अग्रवाल मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में जुटे हैं.

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पलामू. डालटनगंज विधानसभा क्षेत्र (Daltonganj Assembly Constituency) का इतिहास अंग्रेजी राज से जुड़ा हुआ है. अंग्रेज कमिश्नर कर्नल डालटन के नाम पर यहां का नाम डालटनगंज पड़ा. कोयल नदी के तट पर बसा डालटनगंज शहर का नाम बाद में चेरो राजा मेदनी राय के नाम पर डालटनगंज से बदलकर मेदिनीनगर हुआ. डालटनगंज में इस समय हर ओर चुनावी रंग दिख रहे हैं. बीजेपी (BJP) प्रत्याशी को तौर पर आलोक चौरसिया (Alok Chaurasia) चुनाव मैदान में हैं. 32 साल के चौरसिया यहां के मौजूदा विधायक भी हैं. उनके 5 साल के कामकाज को देखते हुए पार्टी ने उन्हें दोबारा प्रत्याशी बनाया है.

आलोक चौरसिया का कहना है कि पिछले पांच साल में डबल इंजन की सरकार ने इस क्षेत्र में जो काम किए हैं, उसके आधार पर एक बार फिर जनता का आशीर्वाद मुझे मिलेगा.

बीजेपी को टक्कर देने के लिए गठबंधन ने चुनावी मैदान में पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता कृष्णानंद त्रिपाठी उर्फ केएन त्रिपाठी को मैदान में उतारा है. केएन त्रिपाठी को भरोसा है कि उन्हें जेएमएम और कांग्रेस का पारंपरिक वोट मिलेगा और इसी आधार पर उनकी जीत होगी.

कांग्रेस उम्मीदवार का कहना है कि शहरी इलाके के लोग समझ चुके हैं. ग्रामीण इलाके के लोगों को समझाना पड़ा रहा है कि बिना उनके क्षेत्र का विकास नहीं हो सकता है. अगला पांच साल मेरे लिए बेहद कठिन वक्त होगा, क्योंकि चुनाव जीतने के बाद जनता की उम्मीदों को पूरा करने के लिए हमें रोजाना 20 घंटा काम करना होगा. विधायक आलोक चौरसिया ने पिछले पांच साल में कोई काम नहीं किया.

2014 में 4 हजार वोट से जीते थे आलोक चौरसिया

2014 के चुनाव में आलोक चौरसिया जेवीएम के टिकट पर यहां चुनाव जीते थे, लेकिन बाद में वो बीजेपी में शामिल हो गये. पिछले विधानसभा चुनाव में आलोक चौरसिया को 59 हजार 202 मत मिले थे, जबकि केएन त्रिपाठी को 54 हजार 855 और तीसरे नंबर पर रहे भाजपा के मनोज सिंह को 42 हजार 597 वोट प्राप्त हुए थे. इस बार डालटनगंज सीट पर जेवीएम प्रत्याशी डॉ. राहुल अग्रवाल त्रिकोणीय मुकाबला बनाने की कवायद में जुटे हैं.

कभी जातीय समीकरण हावी नहीं रहा
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डालटनगंज विधानसभा क्षेत्र की स्थापना काल से ही अलग पहचान रही है. आजादी के बाद 1951 से लेकर 14 नंबर 2000 तक संयुक्त बिहार और उसके बाद झारखंड में डालटनगंज राज्य की पहला विधानसभा क्षेत्र है, जहां कभी जातीय समीकरण हावी नहीं हुए. चुनाव में जात-पात की राजनीति का कोई स्थान नहीं रहा. राज्य के पहले विधानसभा अध्यक्ष और संयुक्त बिहार में मंत्री और बाद में सांसद रहे इंदर सिंह नामधारी इसी इलाके से आते हैं. जातीय समीकरणों की बात को इससे समझ सकते हैं कि यहां बमुश्किल 70-80 घर सिख समुदाय के हैं. इस समुदाय के वोटरों की कुल संख्या करीब 1000-1100 है. इसके बावजूद सिख समुदाय के इंदर सिंह नामधारी 6 बार यहां से विधायक चुने गए.

चुनावी इतिहास 

प्रथम विधानसभा चुनाव में बंगाली परिवार के अमीय कुमार घोष कांग्रेस से 1952 में यहां के विधायक बने. कायस्थ परिवार के उमेश्वरी चरण 1957 में कांग्रेस के विधायक बने. वहीं 1962 में ब्राह्मïण समाज के सच्चिदानंद त्रिपाठी, स्वतंत्र पार्टी से निर्वाचित हुए. वैश्य समाज से पूरनचंद 1967, 1969, 1972 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी और 1977 में जनता पार्टी से चुनाव जीतकर विधायक बने. 1980 में सिख समुदाय के इंदर सिंह नामधारी भाजपा से और 1985 में ईश्वरचंद पांडेय कांग्रेस से विधायक बने. 1990 में इंदर सिंह नामधारी भाजपा से, 1995 में जनता दल से, 2000 में जदयू से, 2005 में फिर जदयू से और 2007 का उपचुनाव निर्दलीय जीतकर लगातार 6 बार विधायक रहे.

2009 में केएन त्रिपाठी कांग्रेस से और 2014 में आलोक कुमार चौरसिया जेवीएम से जीतकर यहां से विधायक बने. वैसे डालटनगंज विधानसभा के जातीय समीकरण पर नजर डाला जाए, तो पिछड़ा, ब्राहमण, मुस्लिम, कायस्थ व अनुसूचित जाति व जनजाति के मतदाता यहां निर्णायक साबित होते हैं.

 

 

मतदाताओं की संख्या

महिला वोटर्स - 163555

पुरुष वोटर्स  -  181259

कुल वोटर्स -   344814

(रिपोर्ट- नीलकमल)

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First published: November 19, 2019, 12:34 PM IST
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