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झारखंड विधानसभा चुनाव 1st फेज: स्वास्थ्य मंत्रियों का रहा है दिलचस्प इतिहास, क्या रामचंद्र चंद्रवंशी बदल पाएंगे

Naween Jha | News18 Jharkhand
Updated: November 30, 2019, 7:28 AM IST
झारखंड विधानसभा चुनाव 1st फेज: स्वास्थ्य मंत्रियों का रहा है दिलचस्प इतिहास, क्या रामचंद्र चंद्रवंशी बदल पाएंगे
स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी एक बार फिर विश्रामपुर सीट से चुनावी मैदान में हैं.

साल 1995 को वो दौर था, जब रामचंद्र चंद्रवंशी (Ramchandra Chandravanshi) सियासत में आए. उससे पहले वो प्रखंड कार्यालय में नाजिर हुआ करते थे. कहा जाता है कि एक साधु के कहने पर उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी और सियासत में किस्मत आजमाने निकल गये.

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पलामू. झारखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर एक दिलचस्प इतिहास रहा है. यहां स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए चुनाव में किसी को जीत नहीं मिली है. जनता ने स्वास्थ्य मंत्रियों को हराने का काम किया है. ऐसे में वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी क्या इस बार इस इतिहास को बदल पाएंगे. स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी (Ramchandra Chandravanshi) के सामने अपनी बिश्रामपुर सीट (Bishrampur Assembly Constituency) बचाने की बड़ी चुनौती है. उनके सामने एक बार फिर कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री चंद्रशेखर दुबे (Chandrasekhar Dubey) उर्फ ददई दुबे चुनावी मैदान में हैं. पिछले 35 साल से इस सीट पर रामचंद्र चंद्रवंशी और चंद्रशेखर दुबे को जीत मिलती रही है. यहां से चार बार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड कांग्रेस के दिग्गज चंद्रशेखर दुबे ने नाम पर है. जबकि रामचंद्र चंद्रवंशी यहां से तीन बार विधायक रहे हैं.

सरकारी नौकरी छोड़ सियासत में आए

साल 1995 को वो दौर था, जब रामचंद्र चंद्रवंशी सियासत में आए. उससे पहले वो प्रखंड कार्यालय में नाजिर हुआ करते थे. कहा जाता है कि एक साधु के कहने पर उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी और सियासत में किस्मत आजमाने निकल गये. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के साथ इन्होंने अपनी सियासी पारी शुरू की. आरजेडी के टिकट पर 1995 में बिश्रामपुर से विधानसभा चुनाव लड़ा. लालू यादव की लहर में रामचंद्र चंद्रवंशी यहां से जीत गये. विधायक के बाद इन्हें मंत्री बनने का भी मौका मिला. लेकिन 2000 का चुनाव चंद्रवंशी हार गये. 2005 में एक बार फिर आरजेडी के टिकट पर बिश्रामपुर में किस्मत आजमाई और इस बार जीत हासिल कर दोबारा विधायक बने. लेकिन अगला चुनाव यानी 2009 में चंद्रवंशी को फिर हार मिली. 2014 में रामचंद्र चंद्रवंशी आरजेडी को छोड़कर बीजेपी के साथ हो गये. और मोदी लहर की मदद से तीसरी बार बिश्रामपुर से विधायक बने.

रामचंद्र चंद्रवंशी के नाम पर है यूनिवर्सिटी

स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी पलामू के हैदरनगर के चौकड़ी गांव के रहने वाले हैं. कांग्रेस के वरिष्ट नेता जगनारायण पाठक इसी गांव के रहने वाले थे. स्कूल और कॉलेज की शिक्षा पूरी करने के बाद रामचंद्र चंद्रवंशी को सरकारी नौकरी मिल गई. 1994 में वो गढ़वा जिले के विभिन्न प्रखंड में नाजिर रहे. लेकिन ज्यादा दिन तक सरकारी नौकरी में मन नहीं लगा. इसलिए नौकरी छोड़कर सियासत करने निकल गये. चंद्रवंशी के दो बेटे हैं, ईश्वर सागर चंद्रवंशी और संजय चंद्रवंशी. अपने पिछले कार्यकाल में रामचंद्र चंद्रवंशी ने बिश्रामपुर में इंजीनियरिंग कॉलेज समेत कई शिक्षण संस्थान खोले. उनके नाम पर यूनिवर्सिटी भी खोले गए.

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First published: November 30, 2019, 7:24 AM IST
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