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Kargil Vijay Diwas: शहीद युगम्बर दीक्षित- खून से लथपथ, हाथ में तिरंगा, फहराया था टाइगर हिल पर विजय पताका

शहीद युगम्बर दीक्षित के परिवार को आज भी सराकरी वादों के पूरा होने का इंतजार है.

शहीद युगम्बर दीक्षित के परिवार को आज भी सराकरी वादों के पूरा होने का इंतजार है.

Kargil Vijay Diwas: कारगिल युद्ध के दौरान 23 जून 1999 को मात्र 21 साल की उम्र में पलामू के लाल वीर युगंबर दीक्षित ने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी. टाइगर हिल पर कब्जा करने के दौरान वे दुश्मन की गोली का शिकार हुए और शहीद हो गये.

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    रिपोर्ट- संजय भारती

    पलामू. आज पूरे देश विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas) मना रहा है. कारगिल युद्ध की 22वीं वर्षगांठ देशभर में मनाई जा रही है. इस मौके पर लोग कारगिल के शहीदों को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं. पलामू के युगम्बर दीक्षित ने 23 जून 1999 को टाइगर हिल पर कब्जा करते हुए अपनी जान की कुर्बानी दे दी थी. लेकिन दुख की बात ये है उनके परिवार को आज भी सरकारी वादों के पूरा होने का इंतजार है.

    कारगिल युद्ध के दौरान 23 जून 1999 को मात्र 21 साल की उम्र में पलामू के लाल वीर युगंबर दीक्षित ने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी. टाइगर हिल पर कब्जा करने के दौरान वे दुश्मन की गोली का शिकार हुए और शहीद हो गये. आज शहीद युगम्बर की वीरता की कहानी पलामू के हर घर में कही जाती है.

    शाहिद युगम्बर दीक्षित की पत्नी आज भी खुद को अकेला महसूस करती हैं और जब पति की चर्चा होती है, तो भावुक हो जाती हैं. आंखों से आंसू छलकने लगते हैं. वह कार्यक्रमों में जाने से परहेज करती हैं, क्योंकि पति की याद उन्हें अंदर तक रुला देती है. पूरा परिवार शहीद के बिना बेसहारा महसूस कर रहा है.

    उस वक्त शहीद युगम्बर के घर लालू , राबड़ी देवी समेत कई बड़े नेता पहुंचे थे और तमाम तरह के सरकारी वादे किए गए थे. मगर उनमें से अधिकतर वादे अभी तक कागजी प्रक्रिया में उलझी हुई है. सरकार के द्वारा युगम्बर दीक्षित के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, पेट्रोल पंप, उनके नाम पर रेलवे हाल्ट और स्कूल का निर्माण कराने का वादा किया गया था. मगर इन सभी वादों में किसी को आज तक पूरा नहीं किया गया.

    शहीद युगम्बर दीक्षित पांच भाइयों में सबसे छोटे और परिवार के लाडले थे. परिवारवालों को उनकी वीरता पर गर्व है. युगम्बर समेत पांच भाइयों में से तीन भाई सेना में थे.

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