कारगिल विजय दिवस: डबडबाई आंखों से बोलीं शहीद की पत्नी- हमारी किसी को फिक्र नहीं
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कारगिल विजय दिवस: डबडबाई आंखों से बोलीं शहीद की पत्नी- हमारी किसी को फिक्र नहीं
कारगिल दिवस पर शहीद युगांधर दीक्षित को याद कर रो पड़ीं पत्नी

शहीद युगाधंर के परिवार को जो सुविधाएं मिलनी चाहिए, वो आज भी नहीं मिली है. हालांकि दो साल पहले रिटायर्ड सैनिकों के प्रयास से परिवार को सरकारी जमीन दिलवाई गई. लेकिन बेटे को नौकरी और अन्य सरकारी वादे अबतक पूरे नहीं हुए हैं.

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कारगिल की लड़ाई में पलामू के लाल युगांधर दीक्षित भी शहीद हुए थे. कारगिल विजय दिवस पर आज उनका परिवार उन पर गर्व कर रहा है. लेकिन परिवार को इस बात का भी मलाल है कि उन्हें जो सरकारी सुविधाएं मिलनी चाहिए, वह अभी तक नहीं मिली हैं. 23 जून 1999 को देश के लिए लड़ते हुए शहीद युगांधर ने अपने प्राण गंवाए थे.

शहीद पिता की राह पर चलने की कसम

पलामू के सतबहिनी भदुमा गांव निवासी युगांधर दीक्षित जम्मू के पुंछ में लड़ाई लड़ते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिये थे. शहीद युगांधर के परिवार में पत्नी, एक बेटे और एक बेटी हैं. कारगिल दिवस के मौके पर आज पूरा परिवार शहीद को याद कर रो पड़ा. हालांकि बेटे का कहना है कि उसे अपने पिता की राह पर ही चलना है.



martyred family
शहीद के परिवार को वादे के मुताबिक नहीं मिलीं सुविधाएं

बीच में छुट्टी छोड़कर गये थे लड़ने

शहीद का भतीजा मृत्युंजय दीक्षित पुराने पल को याद करते हुए कहते हैं कि चाचा छुट्टी पर गांव आए थे. लेकिन जैसे ही युद्ध छिड़ने की सूचना मिली, वह बीच में ही अपनी छुट्टी कैंसिल कर ड्यूटी पर लौट गये. परिवार और गांववाले रोकते रह गये, लेकिन उन्होंने नहीं मानी. वह नहीं लौटे, तिरंगे में लिपटे उनका पार्थिव शरीर घर आया.

भुला दिये गये सरकारी वादे 

शहीद के परिवार को जो सुविधाएं मिलनी चाहिए, वो आज भी नहीं मिली है. हालांकि दो साल पहले रिटायर्ड सैनिकों के प्रयास से परिवार को सरकारी जमीन दिलवाई गई. लेकिन बेटे को नौकरी और अन्य सरकारी वादे अबतक पूरे नहीं हुए हैं.

पूर्व सैनिक बृजेश शुक्ला का कहना है कि शहीद के परिवारों को समय रहते सरकारी सुविधाएं मिल जानी चाहिए. युगांधर दीक्षित के परिवार से किये गये वादे अबतक पूरे नहीं हुए.

पलामू के युवाओं के लिए शहीद युगांधर दीक्षित प्रेरणा के श्रोत हैं. लोग उनका नाम सम्मान के साथ लेते हैं.

रिपोर्ट- नीलकमल

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