इस एक पेंच के चलते 47 साल से अधूरा पड़ा है मंडल डैम

मंडल डैम

मंडल डैम परियोजना को केंद्र सरकार ने अधिग्रहित कर लिया है. 2020 तक योजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसमें कुल 1622 करोड़ रुपये की लागत आयेगी.

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    47 साल से अधूरे पड़े मंडल डैम को पूरा करने की पहल केन्द्र व रघुवर सरकार ने की है. झारखंड के पलामू प्रमंडल में पड़ने वाले इस डैम का काम 1972 में शुरू हुआ था. तब इसकी योजना लागत 30 करोड़ रुपये थी. इससे पलामू, गढ़वा और औरंगाबाद जिलों को पानी मिलने वाला था. यह परियोजना 1993 में लगभग पूरी हो गयी थी. लेकिन वन विभाग की आपत्ति के कारण पेंच फंस गया.

    दरअसल डैम के लिए जहां गेट का निर्माण होना है, वह जमीन पलामू टाइगर रिजर्व एरिया में पड़ता है. इसलिए गेट का निर्माण करने से पहले वन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र चाहिए था, जो मिल नहीं सका. इसलिए परियोजना का काम रुक गया. नौ गेट का निर्माण नहीं होने के कारण पानी को रोकना मुश्किल था.

    बता दें कि इस परियोजना के तहत आने वाले मोहम्मदगंज बराज का काम पूरा हो चुका है. लेफ्ट कनाल का भी काम करीब 90 फीसदी तक हो गया है. राइट कनाल का भी काम पूरा हो चुका है. परियोजना के लिए 1007. 29 हेक्टेयर वन भूमि का स्टेज-2 क्लीयरेंस होना है. इसके लिए 24 शर्तें रखी गयी हैं. जिन्हें अब पूरा किया जा रहा है.

    परियोजना को अब केंद्र सरकार ने अधिग्रहित  कर लिया है. इससे झारखंड की 19604  हेक्टेयर भूमि और बिहार की 91917 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई की सुविधा मिल पाएगी. 2020 तक योजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. योजना को पूरा करने में कुल 1622 करोड़ रुपये की लागत आयेगी. इसमें भारत सरकार 1378.61 करोड़ रुपये, बिहार सरकार 213 करोड़ तथा झारखंड सरकार मात्र 31 करोड़ रुपये खर्च करेगी.

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