झारखंड: इस गांव में ज़हरीला पानी पीकर मर रहे हैं लोग, जन्म से हो रहे विकलांग

झारखंड के पलामू ज़िले के गांव में जन्मजात विकलांगता के शिकार हो रहे बच्चे.

कुपोषण के मामले में भारत में अग्रणी राज्य झारखंड के एक गांव में फ्लोराइड मिले पानी की वजह से 25 से ज़्यादा लोग विकलांग हो चुके हैं. जन्मजात विकलांगता फैल रही है. बीमारी से 20 से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं.

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    संजय भारती
    पलामू. बिश्रामपुर प्रखंड के एक गांव में हड्डियों से जुड़ी बीमारी महामारी की तरह फैल चुकी है. इसकी वजह फ्लोराइड युक्त पानी पीने को बताया जा रहा है. गांव में 100 से ज़्यादा रोगियों को जोड़ों के दर्द, हड्डी के पतले होने, कमर में दर्द होने जैसे लक्षण हैं. हालत इतनी खराब हो गई है कि लोग चल भी नहीं पा रहे हैं क्योंकि उनकी हड्डियां बहुत कमजोर हो चुकी हैं. यही नहीं, फ्लोराइड युक्त दूषित पानी पीने से बच्चों में जन्मजात विकलांगता देखी जा रही है. कई बच्चों के हाथ और पैर जन्म से ही मुड़े हुए हैं, हड्डियां सीधी नहीं हैं. और इस मुद्दे को सुनने वाला कोई नहीं है.

    प्रखंड के तोलरा पंचायत स्थित कुंडी गांव में 200 घरों की आबादी है. 100 से अधिक लोग हड्डियों से संबंधित किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त हैं. पूरे गांव में 10 साल से कम उम्र के 10 से ज़्यादा बच्चे ऐसे रोगों के शिकार हैं. मिसाल के तौर पर गांव की शोभा देवी की तीन साल की बेटी नंदिनी इस बीमारी की चपेट में है. नंदिनी के हाथ और पैर जन्म से ही मुड़े हुए हैं. गांव के अन्य कई बच्चों में भी इसी तरह के लक्षण हैं.

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    100 से ज़्यादा ग्रामीण आबादी हड्डियों के गंभीर रोगों की चपेट में है.


    पांच गुना ज़्यादा है फ्लोराइड!
    महामारी की तरह फैल रहे इस रोग के बारे में ग्रामीणों ने सभी जलस्रोतों की जांच करवाई, जिसमें पाया गया कि सभी पानी में फ्लोराइड की मात्रा 3 से 4 पीपीएम तक है. स्वास्थ्य के नज़रिये से यह कितनी हानिकारक है, आप ऐसे समझ सकते हैं कि डॉक्टरों के अनुसार फ्लोराइड की मात्रा पानी में 0.7 से अधिक नहीं होनी चाहिए. यानी पांच से छह गुना ज़्यादा फ्लोराइड इस गांव के लिए जानलेवा हो रहा है. गांव के ही तौसीफ अहमद खान बताते हैं कि उनके गांव में पीने का एकमात्र स्रोत कुआं ही है, जिसका पानी ज़हरीला होने के बाद भी मजबूरी है. खान ने बताया कि इस पानी के कारण वह अपने भाई और पिता दोनों को खो चुके हैं.

    किसी ने नहीं सुनी मौतों की आहट!
    गांव में चापाकल की भारी कमी है लोगों को मजबूरन कुएं का पानी पीना पड़ता है. इसमें कई बार फिल्टर किट लगाई गई लेकिन एक से दो महीनों से ज़्यादा यह किट टिकती नहीं है. ग्रामीण लगातार आरओ प्लांट लगाने की मांग कर रहे हैं, पर कोई सुनवाई नहीं है. फ्लोराइड युक्त पानी से हो रही मौतों के बावजूद लोग दूषित पानी पी रहे हैं क्योंकि कोई विकल्प नहीं है. ज़िला पार्षद विजय रविदास ने कहा कि कई बार इस मुद्दे को ज़िला परिषद की बैठक में उठाने के बावजूद आज तक यहां किसी का कोई ध्यान नहीं है.

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