बापू के इस 'सपने' की कौन सुने सिसकी?

बुनियादी विद्यालय पोलपोल

अभिभावकों का कहना है कि सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देती है, मगर शिक्षक ही नहीं रहेंगे तो बेटियां कैसे पढ़ेंगी.

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    2 अक्टूबर को हर साल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बताये गये रास्ते पर चलने का संकल्प लिया जाता है. लेकिन उनके उस सपने का क्या हश्र है, जिसे जिंदा रहते हुए उन्होंने देखा था. पलामू का यह स्कूल उसके बारे में बता रहा है.

    दरअसल गांधी जी का सपना था कि गांव-गांव में बुनियादी विद्यालय खोलकर बच्चों को बुनियादी शिक्षा दी जाए. बुनियादी शिक्षा के साथ-साथ स्वच्छता का भी पाठ पढ़ाया जाए. इसी उद्देश्य से पूरे देश में बुनियादी विद्यालयों की स्थापना की गई थी. पलामू में भी 1950 में कई बुनियादी विद्यालय खुले. मगर आज उन विद्यालयों की हालत खस्ता है.

    पलामू जिले के सदर प्रखंड का पोलपोल बुनियादी विद्यालय. 1950 में स्थापित इस विद्यालय में सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है. ना तो चहारदीवारी, ना ही पर्याप्त शिक्षक. महज दो शिक्षकों के सहारे विद्यालय का काम चलता है. जाहिर है छात्र-छात्राओं को ठीक से पढ़ाई नहीं मिल पाती. विद्यालय भवन अब जर्जर हो चुका है.

    एनएच-75 के किनारे होने के कारण बच्चों पर दुर्घटना का खतरा बना हुआ रहता है. छात्रों का कहना है कि वे विद्यालय को साफ करते हैं, मगर बाउंड्रीवाल नहीं होने की वजह से बाहरी लोग आकर गंदा कर देते हैं. शिक्षकों की कमी के कारण उनकी पढ़ाई भी बाधित होती है.

    विद्यालय की इस हालत से अभिभावक भी नाराज हैं. उनका कहना है कि सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देती है, मगर शिक्षक ही नहीं रहेंगे तो बेटियां कैसे पढ़ेंगी. प्रभारी शिक्षक दिनेश शुक्ला का कहना है कि पिछले दो साल से चहारदीवारी और शिक्षक की मांग की जा रही है. लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है.

    डालटनगंज-रांची मुख्य मार्ग एनएच-75 से रोजाना अधिकारी और मंत्री गुजरते हैं. लेकिन किसी रहम की नजर इस विद्यालय पर अबतक नहीं पड़ी.

    (नीलकमल की रिपोर्ट)

     

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