लॉकडाउन में लावारिस जानवरों के लिए मसीहा बने ये युवा, खोज-खोज कर देते हैं खाना
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लॉकडाउन में लावारिस जानवरों के लिए मसीहा बने ये युवा, खोज-खोज कर देते हैं खाना
मेदिनीनगर में कुछ युवाओं ने इस लॉकडाउन में लावारिस जानवरों को खाना देने का बीड़ा उठाया है.

संस्था से जुड़े युवक-युवतियां सुबह-सुबह घर-घर जाकर लोगों से रोटी, चावल, बिस्किट आदि लेकर इकट्ठा करते हैं. फिर शहर में घूम-घूम कर आवारा जानवरों (Stray animals), कुत्ता, गाय, बैल को खाना (Food) देते हैं. जिस दिन खाना कम पड़ता है, उस दिन अपने पैसे खर्च कर जानवरों को भोजन उपलब्ध कराते हैं.

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पलामू. कोरोना (Corona) को लेकर जारी लॉकडाउन (Lockdown) में इंसान तो इंसान, बेजुबान जानवरों को भी पेट भरने में परेशानी हो रही है. लेकिन मेदिनीनगर में कुछ युवाओं ने इन जानवरों को भूखे नहीं रहने देने का संकल्प लिया है. ये युवा रोजाना शहर में घूम रहे आवारा जानवरों (Stray animals) को खाना देते हैं. बीते 22 मार्च से ये सिलसिला जारी है. ये सभी पीसीएपीएफ (Prevention of Cruelty to Animals & Plants Foundation) नामक संस्था से जुड़े हुए हैं.

सुबह-सुबह घर-घर जाकर जमा करते हैं खाना 

संस्था से जुड़े युवक-युवतियां सुबह-सुबह घर-घर जाकर लोगों से रोटी, चावल, बिस्किट आदि लेकर इकट्ठा करते हैं. फिर शहर में घूम-घूम कर आवारा जानवरों, कुत्ता, गाय, बैल को खाना देते हैं. जिस दिन खाना कम पड़ता है, उस दिन अपने पैसे खर्च कर जानवरों को भोजन उपलब्ध कराते हैं. खिचड़ी, बिस्किट, रोटी और गुड़ जानवरों को खाने में दिया जाता है.



होटल- रेस्टोरेंट बंद होने के चलते भूखे रहते थे जानवर 
इस काम में टीम लीडर सलोनी सिंह को कुमारी मोनिका, ज्योति प्रिया, दिव्य रश्मि, ललित कुमार
हैप्पी चौधरी और अमित कुमार का साथ मिलता है. टीम लीडर सलोनी सिंह ने बताया कि लॉकडाउन के कारण शहर के सारे होटल, रेस्टोरेंट बंद हैं. इससे लावारिस जानवारों को खाना नहीं मिल पा रहा है. इंसान तो अपनी पीड़ा बयां करते हैं, लेकिन ये जानवर नहीं कर सकते. लेकिन हमने इनकी भी पीड़ा महसूस की. इसलिए जानवरों को खाना खिलाने का अभियान शुरू किया.

शहरवासियों ने की सराहना

टीम के इस काम को शहरवासी भी सराह रहे हैं. समाजसेवी परशुराम ओझा का कहना है कि ऐसे कार्य में समाज के दूसरे लोगों को भी आगे आना चाहिए. ताकि इस संकट की घड़ी में इन बेजुबानों को राहत मिल सके.

मेदिनीनगर में पीसीएपीएफ संस्था पिछले कई सालों से लावारिस जानवरों के लिए काम कर रही है. बीमार जानवरों का इलाज कराना, उन्हें पशु चिकित्सालय पहुंचाना, इनके प्रमुख कार्य हैं.

रिपोर्ट- नीलकमल मेहरा

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