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राजमहल लोकसभा सीट: यहां है ईसाई मिशनरी का कब्जा, बीजेपी कड़ी टक्कर देने को तैयार

बीजेपी उम्मीदवार हेमलाल मुर्मू झारखंड सीएम रघुबर दास के साथ
बीजेपी उम्मीदवार हेमलाल मुर्मू झारखंड सीएम रघुबर दास के साथ

इस लोकसभा सीट में छह विधानसभा सीटें- राजमहल, बोरियो, बरहेत, लिटिपारा, पाखुड़ और महेशपुर हैं. छह में दो सीटें बीजेपी और तीन झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास हैं.

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राजमहल लोकसभा सीट साहिबगंज और पाकुड़ जिले में फैली हुई है. यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है. यह क्षेत्र राजमहल की पहाड़ियों और गंगा नदी से घिरा हुआ है. मध्य काल में इस क्षेत्र को उगमहल के नाम से जाना जाता था. क्षेत्र में अकबर मस्जिद और बंगाल के नवाब मीर क़ासिम का महल है. यहां बांग्लादेशी घुसपैठ सबसे अहम मुद्दा है.

कौन हैं प्रत्याशी
राजमहल सीट के लिए 14 प्रत्याशी इस बार चुनाव मैदान में हैं. राजमहल लोकसभा सीट से वर्तमान में झारखंड मुक्ति मोर्चा के विजय हांसदा सांसद हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन के तहत सीट बंटवारे में राजमहल सीट झामुमो के हिस्से में है. पार्टी ने विजय हांसदा को टिकट दिया है. एनडीए की ओर से भाजपा नेता हेमलाल मुर्मू को टिकट दिया गया है.

इस क्षेत्र में अल्पसंख्यक वर्ग और ईसाई मिशनरी का प्रभाव है. माना जा रहा है कि वे विजय हांसदा को समर्थन करनेंगे. विजय हांसदा के पिता थॉमस हांसदा भी राजनीति से जुड़े रहे हैं. थॉमस हांसदा कांग्रेस के सांसद थे.
हेमलाल मुर्मू की झारखंड के कद्दावर आदिवासी नेता के रूप में जाने जाते हैं. वह झामुमो के टिकट पर तीन बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं. हेमंत सोरेन से मतभेद के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी. बीजेपी के टिकट पर पिछली बार खड़े हुए और दूसरे नंबर पर रहे.



बीजेपी उम्मीदवार हेमलाल मुर्मू झारखंड सीएम रघुबरदास के साथ


बीजेपी प्रत्याशी के रूप में हेमलाल 2014 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव और उसके बाद पाकुड़ उप चुनाव हार चुके हैं. सीट से कुल 11 उम्मीदवार खड़े हुए हैं. हांसदा और हेमलाल मुर्मु के अलावा, डॉ. अनिल मुर्मु, अरुण मरांडी, अर्जुन प्रसाद सिंह, ज्योतिन सोरेन, कृष्ण सिंह, बर्नार्ड हेमब्रोम, ताला हंसदा, सुनीराम हेमब्रोम, सुरे सोरेन यहां से खड़े हुए हैं.

पिछले चुनाव का हाल
2014 के चुनाव में बीजेपी के विजय कुमार हंसदक ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमलाल मुर्मू को हराया था. विजय कुमार हंसदक को 3.79 लाख और हेमलाल मुर्मू को 3.38 लाख वोट मिले थे. इस सीट के इतिहास पर एक नजर डाल लेते हैं. 1980 से शुरुआत की जाए तो बात कांग्रेस की आती है, जिसने तब यह सीट जीती थी. 1984 में भी कांग्रेस के हिस्से ही कामयाबी आई.

झामुमो उम्मीदवार विजय हांसदा ने पिछली बार जीत दर्ज की थी.


1989 में पहली बार इस सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा का खाता खुला. 1989 और 1991 में साइमन मरांडी जीते. 1996 में कांग्रेस के थॉमस हंसदा जीते. 1998 में पहली बार इस सीट पर बीजेपी जीती. 1999 में कांग्रेस के थॉमस हंसदा और 2004 में झामुमो के हेमलाल मुर्मू जीते. 2009 का चुनाव बीजेपी के देविधान बेसरा जीतने में कामयाब हुए. 2014 का चुनाव झामुमो के विजय कुमार हंसदक ने जीता.

झामुमो उम्मीदवार विजय हांसदा


सामाजिक समीकरण
इस लोकसभा सीट में छह विधानसभा सीटें- राजमहल, बोरियो, बरहेत, लिटिपारा, पाखुड़ और महेशपुर हैं. छह में दो सीटें बीजेपी और तीन झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास हैं. इसमें बोरियो, बरहेत, लिटिपारा और महेशपुर अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है. 2014 के आम चुनाव के दौरान इस सीट पर मतदाताओं की संख्या करीब 13.53 लाख थी. इसमें 6.91 लाख पुरुष और 6.61 लाख महिला मतदाता शामिल हैं. माना जाता है कि ईसाई मिशनरी और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े वोटर यहां जीत और हार में बड़ा फर्क करते हैं.
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