Ramgarh News: वैज्ञानिक खेती से बंजर जमीन को बनाया सोना, अब हर महीने लाखों की कमाई

तीन एकड़ बंजर जमीन में मेहनत से उगाए फल और सब्जियां, अब हजारों की कमाई कर रहा किसान

तीन एकड़ बंजर जमीन में मेहनत से उगाए फल और सब्जियां, अब हजारों की कमाई कर रहा किसान

वर्ष 1983 में बेदिया परिवार ने जरजरा- गरसुल्ला मुख्य मार्ग से सटे तेतरिया में तीन एकड़ बंजर भूमि खरीदी थी. यहां पहले सिर्फ घास उगती थी. उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए चेक डैम की मिट्टी को खेतों में डाला. किसान ने मेहनत कर खेतों में सब्जियां उगाकर हजारों की कमाई शुरू कर दी.

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जावेद खान

रामगढ़. सरकारी नौकरी से रिटायरमेन्ट के बाद अमूमन लोग आराम के मूड में रहते हुए जीवन जीना पसंद करते हैं. इसके विपरित बड़ाकागांव प्रखंड के जरजरा निवासी बिंधयाचल बेदिया ने खेती-किसानी को अपने रोजगार और व्यस्त स्वस्थ्य जीवन जीने का माध्यम बनाया. इसकी तैयारी उन्होंने कोल इंडिया से रिटायरमेंट से पहले ही शुरू कर दिया था. बेदिया खेती-बाड़ी से फुर्सत मिलने पर कोयला श्रमिकों के कल्याण के लिये भी ट्रेड यूनियन के माध्यम से कार्य करते हैं.

वर्ष 1983 में उन्होंने जरजरा- गरसुल्ला मुख्य मार्ग से सटे तेतरिया में तीन एकड़ बंजर भूमि खरीदी थी. इस बंजर भूमि पर पहले सिर्फ घास उगती थी. उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए चेक डैम के मिटटी को खेतों में डाला गया. यहां सिंचाई की सुविधा नगण्य थी, लेकिन उन्होंने मेहनत कर बंजर खेत हरियाली से लबरेज होते हुए सोना उगल रहे हैं और उनके परिवार के जीविका का साधन बनाते हुए उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बना दिया है.

प्रति माह  हजारों रुपये की हो रही आमदनी, बेटे-पत्नी भी करते है सहयोग- प्रति माह सब्जी, पपीता, मौसमी फल, समेत अन्य फसल बेच कर 25 से 30 हजार रुपये प्रति माह की कमाई कर रहे हैं. पत्नी पक्वा देवी खेती में मदद करने के साथ-साथ सब्जी के बेचने में मदद करती हैं. सब्जी खरीदने व्यापारी सीधे उनके खेत तक पहुंचते हैं. मेट्रिक तक पढ़े उनके पुत्र रवि सयाल-उरीमारी के साप्ताहिक हाट में जाकर सब्जी बेचते हैं. सबकुछ नगद और कैश में होता है . एक और  पुत्र  नित्यानंद जो बीए करके निजी तौर पर ट्यूशन पढ़ाने का कार्य करता है. वो भी खेती में मदद करता है.
वैज्ञानिक तरीके से करते हैं खेती-

तीन एकड़ जमीन पर खेती शुरू करना आसान नहीं था. सिंचाई के नाम पर सिर्फ एक कुआं था. सिंचाई के लिए डीप बोरिंग करवाया. इसके बाद ड्रिप विधि से सिंचाई शुरू किया. प्लास्टिक शीट से पौधे के को कवर किया गया, ताकि पौधे के नीचे घास-फूश जम नहीं पाये। इस विधि के बाद एक साल तक बिना जोताई के काम चल सकता हैं. जैविक खाद समेत गोबर खाद का इस्तेमाल किया. तकनीक का इस्तेमाल करने से कमाई बढ़ गई.

टमाटर-प्याज -मिर्चा और बीन से उम्मीद-फिलहाल खेतो में एक ओर  राहड़ लहलहा रहा है. वहीं बीन, टमाटर, बैगन, मिर्च, प्याज समेत पपीता की खेती हो रही है. प्रति सप्ताह बीन दो क्विंटल समेत टमाटर 50 क्विटल ,प्याज 20 क्विंटल बेचा जा रहा है. कुल मिलाकर बेदिया परिवार खेती-बाड़ी से आत्मनिर्भर बन कर दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं.

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