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रामगढ़: सीसीएल प्रबंधन ने कंपनी का घाटा कम करने के लिए बिजली कटौती का उठाया कदम

सीसीएल प्रबंधन ने कंपनी के घाटे को पाटने के लिए बिजली कटौती का कदम उठाया है.

सीसीएल प्रबंधन ने कंपनी के घाटे को पाटने के लिए बिजली कटौती का कदम उठाया है.

Ramgarh News: 3.5 करोड़ में से अकेले 2 करोड़ रुपये का बिल नॉन प्रोडक्टिव यूनिट भुरकुंडा,सौंदा डी, सेंट्रल सौंदा, केके,दत्तो-नकारी,सयाल और सेंट्रल सौंदा पर खर्च किया जा रहा है. जबकि यहां से प्रबंधन को आमदनी शून्य है.

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    रिपोर्ट- जावेद खान

    रामगढ़. करोड़ों रुपये के घाटे में चल रहे सीसीएल बडका-सयाल एरिया प्रबंधन बिजली कटौती को लेकर काफी सख्त कदम उठा रहा है. फिलहाल भुरकुंडा,सयाल,सौंदा डी, सीसीएल सौंदा,सेंट्रल सौंदा और केके कोलियरी में 6 से 8 घंटे तक बिजली की कटौती की जा रही है.

    प्रबंधन का कहना है कि एरिया की भुरकुंडा,सयाल,सौंदा डी, सीसीएल सौंदा,और केके कोलियरी से कोयले का उत्पादन नहीं होता है. लेकिन आवासीय और बाजार क्षेत्र में काफी बिजली का उपयोग हो रहा है. इसका सीधा असर प्रबंधन के खजाने पर पड़ रहा है. प्रति माह 3.5 करोड़ रुपये बिजली बिल के रूप में डीवीसी को भुगतान करना पड़ रहा है. यानि 10 से 12 लाख रुपये प्रति दिन बिजली पर प्रबंधन खर्च कर रहा है.

    3.5 करोड़ में से अकेले 2 करोड़ रुपये का बिल नॉन प्रोडक्टिव यूनिट भुरकुंडा,सौंदा डी, सेंट्रल सौंदा, केके,दत्तो-नकारी,सयाल और सेंट्रल सौंदा पर खर्च किया जा रहा है. जबकि यहां से प्रबंधन को आमदनी शून्य है. इन बंद कोलियरियों में सीसीएल कर्मी कम, गैर सीसीएल कर्मी ज्यादा रहते हैं. कुल मिलाकर एरिया में 80 प्रतिशत बिजली बिल डोमेस्टिक में खर्च हो रहा है. अत्याधिक लोड के कारण ट्रांसफार्मर भी जल जा रहे हैं. इसे बनाने के लिए बजट की कमी है.

    पूरे एरिया में 115 डोमेस्टिक इस्तेमाल के लिए छोटे बड़े ट्रांसफार्मर लगे हुए हैं, वही प्रोडक्शन के लिए 12 ट्रांसफार्मर हैं. प्रबंधन बिजली कटौती के साथ-साथ हीटर,वेल्डिंग मशीन, पीला बल्ब जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसके लिए लोगों को चेतावनी भी जारी की गई है. यूनियन के नेताओं को भी बिजली कटौती और गैरजरूरी उपयोग पर रोक के लिए लोगों को जागरूक करने में लगाया गया है.

    बडका-सयाल में 4500 सौ कर्मी है, जबकि 10 हजार से ज्यादा क्वार्टर हैं. जनता मजदूर संघ  बडका-सयाल एरिया के अध्यक्ष अशोक शर्मा ने कहा कि घाटे में चल रही कोलियरी के निवासियों को प्रबंधन का सहयोग करने की जरुरत है. हीटर, पीला बल्ब और टुल्लू पंप के इस्तेमाल से बचें.

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