Jharkhand : भीषण हादसे के सिर्फ 6 माह के भीतर चुरी कोयला खदान शुरू, कई खदानों के लिए बनेगी रोडमैप

चुरी की कोयला खदान परियोजना.

चुरी की कोयला खदान परियोजना.

Jharkhand News : चुरी खदान में संभावना है कि वो देश की सबसे बड़ी अंडरग्राउंड कोयला खदान बन सके. अपनी तरह के इस पहले प्रोजेक्ट को पायलट प्रोजेक्ट कहा जा रहा है क्योंकि इसके भविष्य पर कई खदानों का भविष्य तय हो सकता है.

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जावेद खान

रामगढ़. कोल इंडिया की सभी अनुषांगिक कंपनियों में जब घाटे और दुर्घटनाओं के मद्देनज़र भूमिगत खदानों को बंद किया जा रहा है, तब सीसीएल के नॉर्थ कर्णपुरा एरिया स्थित चुरी भूमिगत खदान से कोयला उत्पादन शुरू किया जाना कोयला उद्योग के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है. इस कोयला खदान का चालू होना कई मायनों में न केवल शुभ बल्कि बेहद महत्वपूर्ण भी है. अव्वल तो दुर्घटना के बाद इस खदान का दोबारा चालू होना सपने से कम नहीं था, वहीं, सीसीएल में अंडरग्राउंड माइनिंग का कल्चर न होने के कलंक को भी फिर शुरू हो रहे उत्पादन से मिटाया जा रहा है.

सीसीएल के पायलट प्रोजेक्ट और सबसे बड़ी भूमिगत कोयला खदान को नया जीवन देने के पूरे घटनाक्रम में जीएम संजय कुमार के नाम की हर तरफ सराहना हो रही है. खान दुर्घटना के बाद चुरी खदान को दोबारा कोयला उत्पादन के लिए तैयार करना किसी चुनौती से कम नहीं था. लेकिन, संजय कुमार की टीम ने न केवल यह कारनामा किया बल्कि भविष्य में चुरी के पैटर्न पर और भी कई भूमिगत खदानें विकसित होने के रोडमैप को भी तैयार कर दिया है.

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जीएम संजय कुमार की टीम को तारीफें मिल रही हैं.

क्या है चुरी खदान की कहानी?

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