झारखंड: रामगढ़ जिले के इन गांवों में युवाओं की नहीं हो रही शादी, वजह जानकर चौंक जाएंगे

इस संबंध में गांव की एक महिला एस देवी ने कहा कि मैं ग्राम जूमरा से हूं. बरसात आते ही रास्ता पर चलना मुश्किल हो जाता है. (सांकेतिक फोटो)
इस संबंध में गांव की एक महिला एस देवी ने कहा कि मैं ग्राम जूमरा से हूं. बरसात आते ही रास्ता पर चलना मुश्किल हो जाता है. (सांकेतिक फोटो)

पतरातू प्रखंड (Patratu Block) के 30-35 गांव के लोग इस सड़क मार्ग का प्रयोग करते हैं. इस संबंध में कंचन महतो ने कहा कि रोड की स्थिति को देखते हुए कोई भी आदमी अपनी बेटी की शादी इन गांवों में नहीं करना चाहता है.

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(रिपोर्ट- जयंत कुमार)

रामगढ़. झारखंड के रामगढ़ जिले (Ramgarh District) के पतरातू प्रखंड (Patratu Block) में कई ऐसे गांव हैं, जहां अभी तक पक्की सड़कें नहीं पहुंच पाई हैं. ऐसे में इन गांवों में नवजवान कई युवकों की शादी नहीं हो पा रही है. कहा जा रहा है कि इन गांवों में सड़क नहीं होने की वजह से लड़की वाले रिश्ते लेकर नहीं आते हैं. जानकारी के मुताबिक, भुरकुंडा, ओरमांझी व मोरबादी (Bhurkunda, Ormanjhi And Morbadi) के लोगों को अभी विकास की दरकार है. कहा जा रहा है कि इन गांवों में आने- जाने में लोगों को काफी परेशानी होती है. साथ ही साथ ट्रांसपोर्टिंग की कोई सुविधा नहीं है. ऐसे में लोगों को इलाके की मात्र एक जर्जर सड़क से होकर यात्रा करना पड़ता है. ऐसे में जर्जर सड़क (Shabby Road) की वजह से कभी भी दुर्घटना घट सकती है. हालांकि, कई वर्ष पहले इस सड़क का शिलान्यास पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा के द्वारा किया गया था.

स्थानीय लोगों के मुताबिक, पतरातू प्रखंड के 30-35 गांव के लोग इस सड़क मार्ग का प्रयोग करते हैं .इस संबंध में कंचन महतो ने कहा कि रोड की स्थिति को देखते हुए कोई भी आदमी अपनी बेटी की शादी इन गांवों में नहीं करना चाहता है. वहीं, इस संबंध में गांव की एक महिला एस देवी ने कहा कि मैं ग्राम जूमरा से हूं. बरसात आते ही रास्ता पर चलना मुश्किल हो जाता है. अच्छी सड़क नहीं होने की वजह से गाड़ी वाले ज्यादा भाड़ा मांगते हैं.



नहीं हो रहे रिश्ते
वहीं, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के छठे चरण के सांकी-जुमरा, जोबो- बराडीह पथ का शिलान्यास हजारीबाग के तत्कालीन सांसद यशवंत सिंहा व तत्कालीन विधायक लोकनाथ महतो द्वारा दो फरवरी 2009 को किया गया था. मगर सड़क कैसी बनी, गुणवत्ता क्या थी, यह सड़क देखने से ही नजर आ जा रहा है. सड़क पर दर्जनों नहीं, सैंकड़ो नहीं बल्कि हजारों गड्ढे हैं. यह भुरकुंडा, मतकमा चौक, चिकोर, पाली, सुद्दी, सांकी, कोढ़ी, कडरू, ओरमंझी और चुटूपालू तक जाती है. इस संबंध में रबिंद्र बेदिया ने कहा कि सड़क न होने की वजह से हमारे बेटे- बेटियों के रिश्ते तक नहीं हो पा रहे हैं.
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