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Jharkhand News: हेमंत सोरेन के मंत्री का विवादित बयान- झारखंड सिर्फ झारखंडियों के लिए

झारखंड के  वित्‍त मंत्री रामेश्‍वर उरांव ने एक बार फिर स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा उठाया है.. (न्‍यूज 18)

झारखंड के वित्‍त मंत्री रामेश्‍वर उरांव ने एक बार फिर स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा उठाया है.. (न्‍यूज 18)

Ramgarh News झारखंड सरकार में वित्तमंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव अक्सर बाहरी और स्थानीय के मुद्दे की बात करते हैं. हाल में ही जब सीएम हेमंत सोरेन के भोजपुरी और मगही भाषा को लेकर दिए विवादित बयान पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी टिप्पणी की तो उरांव ने इसका जवाब दिया था.

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    रिपोर्ट-जावेद खान
    रामगढ. झारखंड सरकार में मंत्री व कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव (Rameshwar Oraon) ने पतरातू में आयोजित विस्थापित -प्रभावित अधिकार समिति के पहले स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए विवादित बयान दिया है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि झारखंड का निर्माण सिर्फ झारखंडियों के लिए हुआ है. बीजेपी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी (BJP) को यहां के लोगों के हितों का ध्यान नहीं  है.।मंत्री ने आगे कहा कि झारखंड सिर्फ झारखंडियों के लिए बना है, मेरे लिए बना है, विधायक अम्बा के लिए बना है.

    कांग्रेस नेता ने कहा कि हजारीबाग, चतरा और पलामू के सांसद यहां के लोगों की हक की आवाज पार्लियामेंट में नहीं उठाते हैं. दरअसल भाजपा इसीलिए बाहर के लोगों को एमपी में टिकट देती है ताकि जब यहां के लोगों की हित की बात हो तो एमपी उस पर पार्लियामेंट में चुप रहे. अगर एमपी यहां के स्थानीय होते तो वे बोलते, चुप नहीं रहते. उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि हजारीबाग में भाजपा को लोकल कैंडिडेट नहीं मिलता है क्या? जनता आने वाले आम चुनाव में  बीजेपी को सबक सिखाने का काम करेगी.

    बता दें कि झारखंड सरकार में वित्तमंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव अक्सर बाहरी और स्थानीय के मुद्दे की बात करते हैं. हाल में ही जब सीएम हेमंत सोरेन के भोजपुरी और मगही भाषा को लेकर दिए विवादित बयान पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी टिप्पणी की तो उरांव ने इसका जवाब दिया था. उन्होंने सीएम नीतीश पर पलटवार करते हुए कहा था कि बिहार में संथाल और उरांव की अच्छी आबादी है. बावजूद नीतीश क्यों नहीं इन भाषाओं को वहां मान्यता दी है. क्या वहां के किसी परीक्षा में इसे शामिल किया गया है.

    उन्होंने कहा था कि बिहार के बांका, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार व बगहा जैसे कई जिले में संथाल और उरांव समाज के लोगों की बड़ी आबादी निवास करती है तो नीतीश ने उनकी भाषा को क्यों नहीं नौकरियों के लिए होनी वाली परीक्षाओं में शामिल किया. यह सभी राज्यों का विशेषाधिकार है. इसमें दूसरे को टिप्पणी नहीं करनी चाहिए. उन्हें दोनों भाषा को परीक्षा में शामिल करना चाहिए. बिहार और झारखंड राज्य अलग हुआ तो उसमें भाषा, संस्कृति और समुदाय के भी मुद्दे शामिल थे. ऐसे में सरकारें निर्णय को लेने के लिए स्वतंत्र है.

    स्थापना दिवस में बडकागांव की कांग्रेस विधायक अम्बा प्रसाद भी मौजूद थीं. इधर पतरातू में थर्मल पावर से विस्थापित हुए 25 गांव के हजारों ग्रामीणों ने अ धिकार के लिए जुलुस निकाला और नारेबाजी की. समित्ति का यह पहला स्थापना दिवस था. इससे पूर्व विस्थापित प्रभावित अधिकार समिति के पहले स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन पतरातू के पीटीपीएस स्थित अंबेडकर पार्क में मंत्री रामेश्वर राव और विधायक अंम्बा प्रसाद ने संयुक्त रुप से उद्घाटन किया.

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