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दीपावली पर बारिश और चाइनीज लाइट ने छीनी कुम्हारों के दियों की रोशनी

News18 Jharkhand
Updated: October 26, 2019, 8:33 AM IST
दीपावली पर बारिश और चाइनीज लाइट ने छीनी कुम्हारों के दियों की रोशनी
रामगढ़ में मिट्टी के दीये बेचते दुकानदार

दिवाली का पर्व रामगढ़ के कुम्हार समाज के लिए खुशी का नहीं रहा. कुम्हार समाज प्रकृति को दोष दे रहा है, क्योंकि बारिश के कारण मिट्टी के सामान भी ज्यादा नहीं बना सके.

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रामगढ़. इस बार का दिवाली का पर्व(Festival of diwali) कुम्हार समाज के लिए खुशी का नहीं रहा, कारण साफ है कि लगातार बारिश (rain) के कारण व्यवसाय पर असर पड़ा है. रामगढ़ (Ramgarh) जिले के बोंगाबार के पास स्थित तकरीबन 15 से 20 घरों की आबादी वाला कुम्हार समाज प्रकृति(nature) को दोष दे रहा है, क्योंकि बारिश के कारण मिट्टी के सामान भी ज्यादा नहीं बना सके और जो सामान मुश्किल से बनाया भी गया है. वह बेच भी नहीं पा रहे हैं. वहीं कुम्हार समाज का कहना है कि मिट्टी के दीये (Clay lamp) के बजाए अब लोग चाइनीस लाइट (Chinese light) पर आकर्षित हो रहे, जिससे उनके व्यवसाय पर बुरा असर पड़ा है.

बारिश के कारण नहीं पक पा रहे दीये

लगातार बारिश के कारण कुम्हार समाज द्वारा बनाए गए सामग्रियों के खरीदार नहीं मिलने के कारण सभी दुखी और मायूस हैं. कारण साफ है कुम्हार अपने बनाए गए सामानों के बेचकर ही जीवन यापन करते हैं. इनके द्वारा निर्मित सामग्री का विक्रय नहीं होने पर इनकी दिवाली फीकी पड़ जाएगी. इस संबंध में आशा कुमारी ने कहा कि इस मौसम में दीये बना रहे हैं, जिसमें दीये पक नहीं पा रहे हैं और जो पक गए है. वे बिक नहीं पा रहे हैं. उनका कहना है कि बारिश की वजह से लोगों को बहुत दिक्कत हो रही है.

रामगढ़ में लगातार हो रही बारिश होकर कुम्हार घर में बना रहे दीपक
रामगढ़ में लगातार हो रही बारिश होकर कुम्हार घर में बना रहे दीपक


प्रकृति की मार से कुम्हार परेशान

माटी कला बोर्ड द्वारा कुम्हार समाज को विकसित करने के लिए काफी कुछ उपाय कर रहा है, लेकिन प्रकृति की मार से कुम्हार परेशान हैं. दुर्गा पूजा के बाद दीपावली का त्यौहार भी इनके लिए फीका रहने वाला है. मिट्टी के सामान मुश्किल से बनाया गया, लेकिन खरीदार नहीं मिलने से आर्थिक मार से लोग परेशान हैं. शिल्पकारों का कहना है कि माटी कला बोर्ड (mati kala board ) द्वारा इनके सामान को बेंचने की व्यवस्था करनी चाहिए. समुचति व्यवस्था नहीं होने के कारण लाखों के आर्थिक नुकसान होने की आशंका है. शिल्पकारों का कहना है कि स्थानीय मिट्टी शिल्पकार द्वारा निर्मित सामग्री को समुचित बाजार उपलब्ध कराया जाता तो, यहां चाइना निर्मित सामान जगह नहीं बना पाता.

(रामगढ़ से जयंत की रिपोर्ट )
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First published: October 26, 2019, 8:33 AM IST
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