अंधविश्वासः 'भौजी साड़ी' पहन छठ की तरह पूजा कर Corona को भगा रहीं महिलाएं

महिलाओं ने छठ की तर्ज पर कोरोना माई की पूजा की.
महिलाओं ने छठ की तर्ज पर कोरोना माई की पूजा की.

झारखंड के रामगढ़ में कोरोना (COVID-19) से निजात पाने के लिए महिलाएं गोजम भौजी साड़ी पूजा कर रही हैं. इसमें ननद के द्वारा दी गई साड़ी पहनकर भाभी सूर्य की पूजा करती हैं और महामारी को दूर भगाने के लिए मन्नत मांगती हैं.

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रिपोर्ट- जयंत कुमार

रामगढ़. झारखंड में कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी का संक्रमण रोकने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है. सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनने और कोरोना संबंधी अन्य प्रोटोकॉल लागू कर महामारी के चेन को तोड़ने के लिए सभी काम किए जा रहे हैं. सरकार के साथ-साथ आम लोग भी इस बीमारी से निजात पाने की कोशिश में जुटे हैं. वहीं, प्रदेश के रामगढ़ जिले में कोरोना महामारी को दूर भगाने के लिए मेडिकल सुविधाओं के साथ-साथ अंधविश्वास का भी सहारा लिया जा रहा है. इस अजीब तरीके के बारे में जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे.

जी हां, झारखंड के रामगढ़ में कोरोना को भगाने के लिए अंधविश्वास का अनोखा रूप देखने को मिल रहा है. कोरोना महामारी से निजात पाने के लिए महिलाएं गोजम भौजी साड़ी पहनकर पूजा कर रही हैं. इसमें ननद के द्वारा दी गई साड़ी पहनकर भाभी सूर्य की पूजा करती हैं और कोरोना भगाने के लिए मन्नत मांगती है. रामगढ़ के गोला और रांची से सटे ग्रामीण इलाकों में ये पूजा खूब हो रही है.



स्थानीय लोगों का कहना है कि हालांकि इस पूजा का एक मकसद ननद-भाभी के बीच खराब रिश्ते को ठीक करना भी है. गोला इलाके में यह प्रथा सालों से चली आ रही है. मगर कोरोनाकाल में इसे कोरोना से जोड़ दिया गया है. स्थानीय महिला मीना देवी का कहना है कि कोरोना माई को शांत करने के लिए गोजम पूजा महिलाएं कर रही हैं. इस दौरान भाभी नदद के द्वारा दी गई साड़ी पहनकर सूर्य देवता से सारे कष्ट दूर करने की मिन्नत मांगती हैं.
वैसे कमला एकादशी के मौके पर सालों से इस पूजा की परंपरा चली आ रही है. पहले परिवार की सुख शांति के लिए लेकिन इस बार कोरोना से निजात के लिए महिलाओं ने सूर्य उपासना की. इलाके की करीब पांच सौ से ज्यादा महिलाओं ने रविवार को ये पूजा-पाठ किया. ये पूजा छठ के अनुरूप ही किसी नदी या तालाब में जाकर किया जाता है. महिलाओं के मुताबिक वे छठ महापर्व की तरह सूर्योदय से पहले नदी जाती हैं और नदी में स्नान कर सूर्य को जल चढ़ाती हैं. यानी छठ महापर्व की तरह ही इस इलाके में भौजी साड़ी में पूजा सालों से हो रही है.
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