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जंगल के नाम पर बची थी झाड़ी, ग्रामीणों की 30 साल की मेहनत से अब लहलहा रहे हैं बड़े-बड़े पेड़

जंगल के नाम पर बची थी झाड़ी, ग्रामीणों की 30 साल की मेहनत से अब लहलहा रहे हैं बड़े-बड़े पेड़

झारखंड के रामगढ़ में पिछले 30 सालों से मुरामकला के जंगलों की सुरक्षा में लगे हुए हैं.

झारखंड के रामगढ़ में पिछले 30 सालों से मुरामकला के जंगलों की सुरक्षा में लगे हुए हैं.

Jharkhand News: जावेद खानरामगढ़ रामगढ़ शहर से सटे मुरामकला के ग्रामीण बीते तीन दशक से जंगलों को सामूहिक रूप से बचाने के अभियान में जुटे हुए हैं. आज ग्रामीणों के प्रयास से 860 एकड़ में फैले मुरामकला का जंगल पेड़ो के हरियाली से लहलहा रहा है. इसमें सखुआ , समेत करंज,जामुन,महुवा आम,बांस और बीमारियों में काम आने वाले कई उपयोगी जड़ी-बूटी के पौधे लोगो के काम आ रहे हैं. इस जंगल को बचाने का प्रयास वर्ष 1986 से शुरू हुआ था. ग्रामीण पिछले 30 सालों से मुरामकला के जंगलों की सुरक्षा में लगे हुए हैं.

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    रिपोर्ट- जावेद खान 
    रामगढ़. जंगल और पेड़-पौधों की सुरक्षा के लिए आज भी कई लोग अपनी पूरी जिंदगी समर्पित कर देते हैं. झारखंड के रामगढ़  (Ramgarh) में पिछले 30 सालों से मुरामकला के जंगलों  (Muramkala Forest) की सुरक्षा में लगे हुए हैं. इससे पहले यहां जंगल के नाम पर सिर्फ झाड़ी और ठूंठ बचा हुआ था. लेकिन अब ये जंगल 860 एकड़ की जमीन पर फैला हुआ है. अब यहां जंगली-जानवर खुलकर विचरण करते हैं. इस जंगल की सुरक्षा में जुटी समिति की दो बार पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है. जावेद खानरामगढ़ रामगढ़ शहर से सटे मुरामकला के ग्रामीण बीते तीन दशक से जंगलों को सामूहिक रूप से बचाने के अभियान में जुटे हुए हैं.

    आज ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से 860 एकड़ में फैले मुरामकला का जंगल पेड़ों की हरियाली से लहलहा रहा है. इसमें सखुआ, समेत करंज, जामुन, महुवा आम, बांस और बीमारियों में काम आने वाले कई उपयोगी जड़ी-बूटी के पौधे लोगो के काम आ रहे हैं. इस जंगल को बचाने का प्रयास वर्ष 1986 से शुरू हुआ था.

    इसकी शुरुआत पूर्व मुखिया गणेश महतो ने अपनी टीम के साथ समित्ति बना कर की थी. बाद में गांव के युवकों ने जंगल बचाने के अभियान को आगे बढ़ाया. रात के अंधेरे में भी समिति पेड़ों की रक्षा करती है और पेड़ काटते समय पकड़े जाने पर आरोपी को ग्राम स्तर पर सजा निर्धारित करती है.

    मुरामकला का यह जंगल संरक्षित वनों की श्रेणी में पूरे राज्य में तीसरे स्थान पर आता है. वनों को बचाने को लेकर वर्ष 1992 और 2016 में राज्य स्तरीय पुरस्कार समित्ति को सरकार ने प्रदान किया है. जंगल में जंगली जानवर भी हैं. इनमें मोर, जंगली सुवर, खरगोश, बंदर, साहिल, नीलगाय, भालू और कोटरा भी है. ग्रामीण यहां पर बायो डायवर्सिटी पार्क बनाने की मांग सरकार से कर रहे हैं. ताकि लोग यहां घूमने आएं और इसी माध्यम उन्हें रोजगार उपलब्ध हो सके.

    पूर्व अध्यक्ष वन सुरक्षा संरक्षण समिति के चिंतामणि पटेल और वर्तमान अध्यक्ष वन सुरक्षा व संरक्षण समिति मनीजर महतो ने बताया कि 1986 में जब अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी की कमी महसूस हुआ तब से जंगल बचाने की मुहिम की शुरुआत हुई. आज मुरामकला के जंगल हरियाली फैला रहा है साथ ही पर्यावरण के संतुलन में सहायक सिद्ध हो रहा है.

    सामाजिक कार्यकर्ता अर्चना महतो ने बताया कि पेड़ों को हम भाई बना कर इसमे रक्षा सूत्र बांधकर इसकी सुरक्षा का शपथ लेते हैं. वन है तो जीवन है, वनों से ही जीवन का आधार है जंगल हमें सब कुछ देते हैं बदले में सिर्फ अपनी सुरक्षा मांगते हैं. ऐसे में हम सबकी जिम्मेदारी है की जंगलों को बचाने कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखें.

    Tags: Jharkhand news, Ramgarh news

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