ताइवान से बीज मंगाकर खेती की, अब इस वजह से पीले तरबूज को खेत में ही सड़ने के लिए छोड़ दिया किसान

किसान गौरव को पीले तरबूज की खेती में आर्थिक नुकसान सहना पड़ा है.

किसान गौरव को पीले तरबूज की खेती में आर्थिक नुकसान सहना पड़ा है.

Ramgarh News: किसान गौरव ने बताया कि ताइवान से ऑनलाइन तरबूज का बीज मंगवाकर सात डिसमिल जमीन में खेती की. खेती में लगभग 10 हजार रुपये की लागत लगी. लेकिन अब तरबूज का खरीदार नहीं मिलने के कारण फसल को खेत में ही सड़ने के लिए छोड़ दिया.

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रिपोर्ट- जावेद खान

रामगढ़. झारखंड के रामगढ़ जिले का गोला प्रखंड कृषि प्रधान क्षेत्र है. गोला प्रखंड के अस्सी प्रतिशत से ज्यादा ग्रामीण कृषि पर निर्भर हैं. हालाकि यहां के किसान खेती में कुछ ना कुछ नया प्रयोग करते रहते हैं. यहां के गांवों में सालोंभर हरी सब्जी की खेती होती रहती है. इसी तरह का प्रयोग करते हुए गोला के चोकड़बेडा के रहने वाले किसान गौरव बेदिया ने ताइवान से बीज मंगवाकर पीले तरबूज की खेती की.

गौरव ने बताया कि ताइवान से ऑनलाइन तरबूज का 20 ग्राम बीज मंगाया था. इसकी कीमत 1550 रुपये पड़ा था. प्रयोग के तौर पर पहले सात डिसमिल जमीन पर तरबूज की खेती की. खेती में लगभग 10 हजार रुपये की लागत पड़ी. आशा के अनुरुप 20 क्विटंल की ऊपज हुई. लेकिन बारिश में कुछ तरबूज सड़ गये और जो बचा है, उसके लिए ग्राहक नहीं मिल रहे. इसलिए तरबूज के फसल को खेत में ही छोड़ दिया. इस खेती से लागत भी नहीं निकला.

उन्होंने बताया कि पीला तरबूज सामान्य तरबूज की भांति ही बाहर से हरा दिखायी देता है. लेकिन उसे काटने पर अंदर से पीला गुदा निकलता है, जो खाने में रसदार और काफी मीठा होता है.
मालूम हो कि पिछले वर्ष भी इसी गांव के राजेंद्र बेदिया ने झारखंड में पहली बार प्रयोग के तौर पर पीले तरबूज की खेती की थी. उसी से प्रभावित होकर किसान गौरव बेदिया ने पीले तरबूज की इस बार खेती की. लेकिन खेती में उसे घाटा सहना पड़ा है. अब वह अपने आर्थिक नुकसान के बदले सरकार से मदद चाहता है, ताकि आगे भी वो खेती में प्रयोग करने की हिम्मत जुटा सके.

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