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झारखंड में पिछले 2 साल में 1131 नक्सलियों की गिरफ्तारी, 45 ने किया सरेंडर, 27 मुठभेड़ में मारे गये

झारखंड में नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले बूढ़ा पहाड़ को करीब-करीब नक्सलमुक्त कर दिया गया है.

झारखंड में नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले बूढ़ा पहाड़ को करीब-करीब नक्सलमुक्त कर दिया गया है.

झारखंड के 24 में से 16 जिले नक्सल प्रभावित हैं. हालांकि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कोडरमा, रामगढ़, सिमडेगा को नक्सल प्रभा ...अधिक पढ़ें

रांची. मुख्यमंत्री हेमंतसोरेन की अध्यक्षता में नक्सल और विधि व्यवस्था को लेकर समीक्षा बैठक की गई. बैठक में वर्तमान में चल रहे नक्सल ऑपरेशन पर विशेष रूप से विचार विमर्श की गई. साथ ही लॉ एंड ऑर्डर को लेकर भी बैठक में समीक्षा की गई. बैठक में मुख्य सचिव, गृह सचिव, प्रधान सचिव के साथ-साथ डीजीपी सहित वरीय पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे. सभी जिलों के एसपी भी इस समीक्षा बैठक में मौजूद रहे.

बता दें कि झारखंड का बूढ़ा पहाड़ नक्सलियों का गढ़ रहा है. बूढ़ा पहाड़ से न सिर्फ झारखंड बल्कि बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में नक्सल मूवमेंट को ऑपरेट किया जाता था. नक्सलियों के शीर्ष नेतृत्व इस जगह पर अपना डेरा डाले हुए था. लेकिन वर्तमान में सुरक्षाबलों के प्रयास से बूढ़ा पहाड़ करीब- करीब नक्सलियों से मुक्त हो चुका है. इसको लेकर विशेष रूप से इस बैठक में चर्चा की गई एवं तमाम रिपोर्ट्स को मुख्यमंत्री के समक्ष पेश किया गया.

बैठक में बताया गया कि बूढ़ा पहाड़, पारसनाथ, सारंडा, पोड़ाहाट और चतरा- गया के सीमावर्ती इलाकों में 25 नए फॉरवर्ड पोस्ट / कैंप स्थापित किए गए हैं. इससे इन इलाकों में अगर कोई उग्रवादी घटना होती है तो सुरक्षाबलों को तुरंत ऑपरेशन के लिए भेजा जा सकेगा. वहीं वर्ष 2020 से लेकर अबतक नक्सलियों के साथ सुरक्षाबलों के 27 मुठभेड़ हुए हैं, जिनमें 27 नक्सली मारे गए हैं, जबकि 1131 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है. सुरक्षाबलों के दबाव के कारण 45 नक्सलियों ने सरेंडर भी किया है. नक्सलियों द्वारा पुलिस से लूटे गए 138 हथियार (आर्म्स) और 774 आईईडी बरामद करने में पुलिस को सफलता मिली है.

बैठक में ये भी बताया गया कि राज्य के 16 जिले नक्सल प्रभावित हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कोडरमा, रामगढ़, सिमडेगा को नक्सल प्रभावित जिलों की सूची से हटा दिया है. 8 जिले अतिनक्सल प्रभावित हैं. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि उग्रवाद प्रभावित इलाकों में ग्रामीण विशेषकर युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर उग्रवादी घटनाओं पर काफी हद तक अंकुश लग सकता है. उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे ग्रामीण इलाकों में तैनात सुरक्षाबलों की जरूरत के सामान को ग्रामीणों से लें.  इससे उन्हें रोजगार मिलने के साथ-साथ आय में भी वृद्धि होगी.

बता दें कि राज्य में आपराधिक गिरोहों के खिलाफ एटीएस को लगातार सफलता मिल रही है. एटीएस शीर्ष आपराधिक गिरोह के 32 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. इनके पास से 51 अत्याधुनिक हथियार और 10 हजार कारतूस बरामद किये गये हैं. आपराधिक गिरोहों के पास से लगभग 76 लाख 97 हजार रुपए बरामद किए गए हैं. कई इंटर स्टेट आपराधिक गिरोहों को पर्दाफाश करने में एटीएस को सफलता मिली है.

Tags: Anti naxal operation, CM Hemant Soren, Jharkhand news, Naxal, Naxal affected area

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