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    झारखंड में 1400 खुदरा शराब कारोबारी धंधा छोड़ने को हुए मजबूर, सरकार को भेजा त्राहिमाम संदेश

    शराब कारोबारियों ने सरकार से तीन मांग की है.
    शराब कारोबारियों ने सरकार से तीन मांग की है.

    शराब कारोबारियों का कहना है कि कोरोना काल में शराब (Liquor) की बिक्री 30 से 40 फ़ीसदी तक गिरी है. लोगों के पास पैसे नहीं हैं कि वह शराब खरीद सके. जबकि दूसरी ओर सरकार अपना रेवेन्यू लगातार बढ़ाती जा रही है.

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    रांची. झारखंड में खुदरा शराब विक्रेता (Wine Seller) अब लाइसेंस के साथ अपने कारोबार को सरेंडर करने का मन बना चुके हैं. रांची में एक प्रेसवार्ता आयोजित कर झारखंड खुदरा शराब विक्रेता संघ ने अपने नुकसान और दर्द को सरकार (Hemant Government) के सामने रखा. शराब कारोबारियों ने राज्य में वैट (VAT) की दर को 50 से 75 फीसदी करने का विरोध किया.

    शराब कारोबारियों ने सरकार के सामने मुख्य रूप से अपनी तीन मांगें रखीं. जिसमें पहली, शराब की बिक्री के अनुरूप ही राजस्व ली जाए. दूसरी, अनुज्ञाधारी से 5% पेनाल्टी घटाकर 0.5% फ़ीसदी हो. तीसरी, कोरोना काल में 10% फ़ीसदी स्पेशल एक्साइज ड्यूटी वापस लेने की मांग की गई.

    रांची प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में पहुंचे प्रदेश भर के करीब 150 लाइसेंस धारी शराब कारोबारियों ने कहा कि सरकार अगर उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं देती है, तो ऐसी हालत में सभी शराब कारोबारियों को व्यापार सरेंडर करने की अनुमति दी जाए.



    झारखंड खुदरा शराब विक्रेता संघ के महासचिव निशांत सिंह ने बताया कि कोरोना काल में सरकार ने अपना रिवेन्यू फिक्स रखा है, जबकि शराब कारोबारियों को उठाव के अनुसार बिक्री नहीं हो पा रही है. ऐसे में उन्हें हर महीने पेनाल्टी भरनी पड़ रही है, जो कि उनकी क्षमता से कहीं ज्यादा है.
     कोरोनाकाल में शराब की बिक्री 30 से 40 फ़ीसदी गिरी

    उन्होंने बताया कि कोरोना काल में शराब की बिक्री 30 से 40 फ़ीसदी तक गिरी है. लोगों के पास पैसे नहीं हैं कि वह शराब खरीद सके. जबकि दूसरी ओर सरकार अपना रेवेन्यू लगातार बढ़ाती जा रही है. इसका भार सीधे शराब कारोबारियों पर पड़ रहा है.

    झारखंड में करीब 1450 लाइसेंस धारी शराब कारोबारी हैं, जो इन दिनों सरकार की नीतियों के कारण नुकसान झेलने को मजबूर हैं. और अब अपना कारोबार सरेंडर करने की स्थिति में आ चुके हैं.
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