Jharkhand : 3 विधायकों के दल-बदल के मामले में स्पीकर ने 17 सितंबर तक मांगा नोटिस का जवाब
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Jharkhand : 3 विधायकों के दल-बदल के मामले में स्पीकर ने 17 सितंबर तक मांगा नोटिस का जवाब
(बाएं से) बाबूलाल मरांडी, बंधु तिर्की और प्रदीप यादव. (फाइल फोटो)

विधानसभा अध्यक्ष ने तीनों विधायकों बाबूलाल मरांडी (Babulal Marandi), प्रदीप यादव (Pradeep Yadav) और बंधु तिर्की (Bandhu Tirkey) को 17 सितंबर तक अपना पक्ष रखने को कहा है.

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  • Last Updated: August 24, 2020, 10:23 PM IST
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रांची. राज्य में झारखंड विकास मोर्चा (JVM) के तीन पूर्व विधायकों के दल-बदल (defection) के मामले में पेच बढ़ता जा रहा है. मामला अब दसवीं अनुसूची के तहत सुनवाई के लिए विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) के पास लंबित है. विधानसभा अध्यक्ष ने तीनों विधायकों बाबूलाल मरांडी (Babulal Marandi), प्रदीप यादव (Pradeep Yadav) और बंधु तिर्की (Bandhu Tirkey) को 17 सितंबर तक अपना पक्ष रखने को कहा है. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या दल-बदल कानून राजनीतिक हितों की दलदल में फंसकर रह गया है.

दल-बदल कानून की राजनीतिक व्याख्या क्या वक्त के साथ बदल जाती है या फिर राजनीतिक हितों के अनुसार इसके अलग अलग मायने तय किये जाते हैं. इन्हीं सवालों को लेकर झारखंड की राजनीति एक बार फिर 3 विधायकों के दलबदल या फिर यूं कहें कि दल विलय को लेकर दसवीं अनुसूची के नियमों के बीच घूमती नजर आ रही है. विधानसभा अध्यक्ष ने तीनों विधायकों बाबूलाल मरांडी, प्रदीप यादव और बंधु तिर्की को 17 सितंबर तक अपना पक्ष रखने को कहा है. ऐसे में कानून के जानकारों ने भी जेवीएम के बीजेपी में विलय की स्थिति पर अपनी राय रखी है.

झारखंड स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष राजेंद्र कृष्ण ने बताया कि बाबूलाल मरांडी ने अगर बीजेपी में विलय से पहले जेवीएम से प्रदीप यादव और बंधु तिर्की का निष्कासन कर दिया है, तो फिर जेवीएम का बीजेपी में विलय दसवीं अनुसूची के तहत वैद्य माना जाएगा. उन्होंने कहा कि पार्टी का विलय होता है, न कि व्यक्ति का. उधर, बीजेपी ने साफ कहा कि चुनाव आयोग के फैसले के बाद स्पीकर के पास कुछ नहीं बचता. पार्टी प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि राज्य सरकार दरअसल नेता प्रतिपक्ष के तौर पर किसी मजबूत आदिवासी नेता को नहीं देखना चाहती. लिहाजा मामले को जानबूझकर राज्य सरकार के इशारे पर लटकाया जा रहा है.




वहीं, विधायक बंधु तिर्की ने भी पूरे मामले को लटकाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कानूनी विशेषज्ञों से राय-मशवरा करने के बाद वे अपना पक्ष स्पीकर के पास रखेंगे. बहरहाल तीनों विधायक कानूनी सलाह मशविरे में जुटे हैं और 17 सितंबर तक अपना पक्ष स्पीकर को भेजने की तैयारी कर रहे हैं. वहीं मामले में जुबानी जंग भी जारी है. बात राजनीति की हो या फिर कानूनी पहलुओं की. इतिहास और वर्तमान अभी तक दल-बदल या फिर दल विलय की गुत्थी को सुलझा नहीं पाया है.
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