झारखंड में कोविड-19 से अब तक 54 सरकारी डॉक्टरों की हुई मौत, किसी को नहीं मिला मुआवजा

झारखंड में अपने ही डॉक्टरों की कोविड से हुई मौत की पुष्टि नहीं कर पा रहा स्वास्थ्य विभाग. (प्रतीकात्मक फोटो)

झारखंड में अपने ही डॉक्टरों की कोविड से हुई मौत की पुष्टि नहीं कर पा रहा स्वास्थ्य विभाग. (प्रतीकात्मक फोटो)

कोरोना से मौत की पुष्टि के लिए डॉक्टरों के परिजनों से कई तरह के कागजात की मांग हो रही है और स्वास्थ्य विभाग अपने ही डॉक्टरों की कोरोना से मौत को सत्यापित नहीं कर पा रहा है.

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रांची. कोरोना संक्रमण से अब तक झारखंड में 54 डॉक्टरों की मौत हो चुकी है. यह आंकड़ा साल 2020 में शुरू हुए कोरोना संक्रमण से अब तक का है. कोरोना संक्रमण का शिकार हुए ये सभी सरकारी डॉक्टर थे, लेकिन इनके परिजनों को अब तक केंद्र सरकार की ओर से घोषित मुआवजा राशि का एक पैसा भुगतान नहीं हुआ है. मृत डॉक्टरों के परिजन कागजी प्रक्रिया में उलझे हैं.

परिजन भटक रहे मुआवजा के लिए

देश के दूसरे राज्यों की तरह झारखंड में भी कोरोना का कहर जारी है. अब तक राज्य में कोरोना से मौत का आंकड़ा 4 हजार 800 पार कर चुका है. कोरोना से अपनी जान गंवानेवालों में राज्य के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत 54 डॉक्टरों के नाम भी शामिल है. लेकिन एक भी डॉक्टर के परिजन को केंद्र सरकार की ओर से घोषित मुआवजे का भुगतान नहीं मिला है. धनबाद ESI अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर एसडी झा की मौत 24 अगस्त 2020 को कोरोना से हो गई थी. आज तक मृत डॉक्टर की पत्नी अपने हक-अधिकार के लिए अधिकारियों से गुहार लगा रही हैं.

आईएमए की सिफारिश भी बेकार
झारखंड IMA ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार को साल 2020 में कोरोना से मरने वाले 20 सरकारी डॉक्टरों की सूची सौंपी थी. इस साल भी अब तक 34 डॉक्टरों की जान कोरोना संक्रमण की वजह से हो चुकी है. यानी कोरोना संक्रमण की वजह से झारखंड ने अब तक अपने 54 सरकारी डॉक्टर खो दिए हैं. IMA का मानना है कि केंद्र सरकार ने कोरोना से मौत को लेकर डॉक्टरों के लिए मुआवजा राशि की घोषणा तो कर दी, पर प्रक्रियाओं के मकड़जाल की वजह से अब तक किसी भी डॉक्टर के परिजनों को लाभ नहीं मिला. कोरोना से मौत की पुष्टि के लिए कई तरह के कागजात की मांग हो रही है और स्वास्थ्य विभाग अपने ही डॉक्टरों की कोरोना से मौत को सत्यापित नहीं कर पा रहा है.

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