झारखंड: अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले रहे 5500 मनरेगाकर्मी 20 अगस्त को देंगे सामूहिक इस्तीफा
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झारखंड: अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले रहे 5500 मनरेगाकर्मी 20 अगस्त को देंगे सामूहिक इस्तीफा
अपने प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ हुई विभागीय कार्रवाई से मनरेगाकर्मी खफा हैं.

झारखंड के सभी 24 जिलों के मनरेगाकर्मियों (MNREGA workers) ने वर्चुअल आपातबैठक कर 20 अगस्त को सामूहिक इस्तीफा (Resign) देने का ऐलान किया है.

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रांची. बीते 27 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल (Strike) पर चल रहे झारखंड के 5500 मनरेगाकर्मी (MNREGA workers) 20 अगस्त को सामूहिक इस्तीफा (Resign) देने की घोषणा की है. अपने प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ हुई कार्रवाई से खफा मनरेगाकर्मियों ने आर-पार की लड़ाई की घोषणा कर दी है. इनकी हड़ताल से राज्य में प्रवासियों को रोजगार देने की योजना पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है.

सोमवार को ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने मनरेगा आयुक्त के साथ बैठक के बाद मनरेगाकर्मियों से कोरोना काल को देखते हुए काम पर लौट आने की अपील की थी. लेकिन मनरेगाकर्मी मंत्री की अपील सुनने को तैयार नहीं हैं. दरअसल उनके नेता अनिरुद्ध के खिलाफ हुई विभागीय कार्रवाई से मनरेगाकर्मियों में आक्रोश है. इस बीच सूबे के सभी 24 जिलों के मनरेगाकर्मियों ने वर्चुअल आपातबैठक कर  20 अगस्त को सामूहिक इस्तीफा देने का ऐलान किया है.

झारखण्ड मनरेगाकर्मी  संघ के प्रदेश सचिव जॉन पीटर बागे ने कहा कि सरकार उनकी सेवा नियमितीकरण, मानदेय बढ़ाने की जगह कार्रवाई कर रही है.



सूबे की ज्यादातर योजनाएं बंद
मनरेगाकर्मियों की हड़ताल की वजह से सूबे की ज्यादातर योजनाएं बंद होने के कगार पर है. सिर्फ बागवानी योजना चल रही है. गांव में रोजगार नहीं मिलने से अब मजदूर मजदूरी की तलाश में शहर की ओर जा रहे हैं. पर वहां भी उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा.

गुमला से मजदूरी के लिए रांची आए मजदूर विनोद सावची ने कहा कि न गांव में रोजगार है न शहर में. ऐसे में उन जैसों की गृहस्थी इस कोरोना संकट में कैसी चलेगी.

'विपक्ष में थे तो समर्थन, अब विरोध' 

हड़ताली मनरेगाकर्मियों की दलील है कि विपक्ष में रहते हुए मानदेय बढ़ाने, सामाजिक सुरक्षा देने और सेवा स्थायी करने की उनकी मांग का समर्थन करने वाले आज सरकार में आने के बाद उनकी मांगों को दरकिनार कर रहे हैं. रोज धमकी दी जा रही है. उनके नेता पर कार्रवाई की जा रही है.

विभागीय मंत्री आलमगीर आलम ने न्यूज-18 के माध्यम से मनरेगाकर्मियों से काम पर लौटने की अपील दोहराते हुए कहा कि मनरेगाकर्मियों के नेता पर हुई कार्रवाई विभागीय अनियमितता से जुड़ा मामला है. इसका हड़ताल से कोई लेना देना नहीं है.

झारखण्ड में मनरेगाकर्मियों की हड़ताल से प्रवासियों को रोजगार उपलब्ध कराने में परेशानी हो रही है. राज्य में जहां पहले सात लाख से ज्यादा लोगों को मनरेगा के तहत  रोजगार मिला था. वह घटकर अब चार लाख के करीब पहुंच गया है.
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