Lockdown: काला पानी से 180 प्रवासी श्रमिक चार्टर्ड विमान से रांची लौटे! मंत्री ने किया स्वागत
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Lockdown: काला पानी से 180 प्रवासी श्रमिक चार्टर्ड विमान से रांची लौटे! मंत्री ने किया स्वागत
अंडमान-निकोबार द्वीप समूह से रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पहुंचे प्रवासी श्रमिक

लॉकडाउन के कारण अंडमान-निकोबार में फंसे झारखंड के 180 प्रवासी श्रमिक शनिवार की शाम हवाई जहाज से झारखंड की राजधानी रांची पहुंच गए.

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रांची. अंडमान-निकोबार द्वीप समूह (Andaman and Nicobar Islands) जिसे पहले लोग काला पानी के नाम से इसलिए जानते थे क्योंकि वहां अंग्रेज आजादी के दीवानों को सजा देकर छोड़ देते थे. उसी काला पानी यानि अंडमान-निकोबार से हेमंत सोरेन सरकार ने लॉकडाउन (Lockdown) में फंसे 180 श्रमिकों को अपने खर्चे पर एयरलिफ्ट कराकर रांची ले आई.

मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर और 20 सूत्री उपाध्यक्ष स्टीफन मरांडी ने एयरपोर्ट पर प्रवासी मजदूरों का स्वागत किया. मजदूरों को अपने अपने गंतव्य के लिए 7 बसों की व्यवस्था की गई थी. एयरपोर्ट पर ही भोजन और पानी की बोतल की भी व्यवस्था सरकार की ओर से की गई थी. सभी श्रमिकों को श्रमिक सम्मान रथ नाम दिए गए बस से अपने अपने घर भेजने के बाद मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि सभी मजदूरों को अपने प्रदेश लाने का सरकार ने संकल्प किया है और सरकार इस संकल्प को पूरा करेगी.

वहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री और 20 सूत्री के उपाध्यक्ष स्टीफन मरांडी ने कहा कि झारखंड-बिहार के मजदूर ऑफ सीजन में दूसरे प्रदेश जाते हैं पर अभी खेती का वक्त आ रहा है और सभी यही खेती करेंगे. सरकार इनके रोजगार की पूरी व्यवस्था करेगी.



31 मई की सुबह भी मुंबई से आएगी विशेष श्रमिक फ्लाइट



पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री ने कहा कि 31 मई की सुबह एक और विशेष विमान श्रमिकों को लेकर मुंबई से उड़ान भरेगी. वहीं अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में कुछ और श्रमिक रह गए हैं, उनको भी सरकार झारखंड वापस लाएगी.

कई मजदूरों ने पहली बार की हवाई सफर
30 मई को अंडमान से रांची लौटे कई मजदूर ऐसे भी थे जो भले ही अंडमान-निकोबार गए तो थे लेकिन उन्होंने हवाई जहाज का पहली बार सफर किया. रांची लौटे मजदूरों की मानें तो यह उनका पहला हवाई सफर था. दुमका के राजेंद्र ने न्यूज18 से हवाई जहाज पर चढ़ने के रोमांच को बात देते हुए कहा कि ऊपर से सिर्फ बादल दिखा.

अब अपने राज्य में ही करेंगे काम
संथाल के अलग-अलग जिलों के रहने वाले सतेंद्र रजवाड़, रंजन नारायण देव और इलाज मरांडी कहते हैं कि एजेंट के कहने पर वह दो पैसा ज्यादा कमाने की लालच में 6 महीना पहले अंडमान गया था पर वहां जितना वादा कर ले गया उतना पैसा भी नहीं दिया और लॉकडाउन में तो कई बार भूखे तक रहना पड़ा.

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First published: May 31, 2020, 1:57 AM IST
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