झारखंडः लालू यादव से मिलने रांची पहुंचा 85 साल का दोस्त, साझा की पुरानी यादें

रिम्स में स्थित केली बंगले में लालू यादव से मिलने पहुंचे सीताराम सिंह.
रिम्स में स्थित केली बंगले में लालू यादव से मिलने पहुंचे सीताराम सिंह.

Bihar Assembly Election: विधानसभा चुनाव के दावेदार की पैरवी लेकर एक हफ्ते से रिम्स (RIMS) का चक्कर काट रहे हैं राजद प्रमुख लालू यादव (RJD Chief Lalu Prasad) के पुराने साथी. आंदोलन के दिनों में लालू के साथ मिलकर करते थे राजनीति.

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रांची. चारा घोटाला मामले में रांची में सजा काट रहे राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू यादव (RJD Supremo Lalu Yadav) इन दिनों रिम्स के केली बंगले में रह रहे हैं. चूंकि बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) की हलचल तेज है, लिहाजा लालू प्रसाद से मिलने रोज कई नेता, कार्यकर्ता रिम्स पहुंचते हैं. किसी को विधानसभा चुनाव में टिकट की ख्वाहिश होती है तो कोई किसी और के लिए टिकट मांगने आता है. इसी क्रम में पिछले एक हफ्ते से लालू यादव से मिलने के लिए उनके एक पुराने साथी रोज रिम्स (RIMS) पहुंचते हैं, लेकिन आज तक उनकी मुलाकात नहीं हो पाई है. 85 साल के बुजुर्ग सीताराम सिंह, लालू यादव के पुराने साथी हैं जो दावा करते हैं कि उन्होंने अपनी जवानी में कई दिन लालू यादव के साथ बिताए हैं.

गुरुवार को भी रिम्स पहुंचे सीताराम सिंह रोहतास के करगहर विधानसभा के रहने वाले हैं. लालू के साथ आंदोलन के दौरान बिताए दिन उन्हें आज भी याद है. सीताराम बताते हैं कि आंदोलन के दिनों में वह लालू जी के साथ कई रातें एक ही चौकी पर गुजार चुके हैं. करगहर विधानसभा से उमाशंकर गुप्ता नामक शख्स को चुनाव का टिकट दिलवाने के लिए लालू के ये बुजुर्ग साथी रांची पहुंचे हुए हैं. पिछले एक हफ्ते की तमाम कोशिशों के बाद भी सीताराम जी की मुलाकात नहीं हो पाई है, फिर भी उन्हें उम्मीद है कि पुराने साथी से भेंट जरूर होगी.

न्यूज 18 के साथ बातचीत में सीताराम सिंह ने बताया कि वे पिछले 1 हफ्ते से रोज केली बंगले का चक्कर लगा रहे हैं, ताकि एक बार अपने पुराने साथी लालू प्रसाद से मुलाकात हो जाए. मगर अभी तक ऐसा संभव नहीं हो सका है. सीताराम बताते हैं कि 1977 में रोहतास के दिनारा विधानसभा से उन्हें जनता पार्टी की ओर से लोकसभा चुनाव का टिकट दिया गया था, लेकिन बिक्रमगंज के तत्कालीन सांसद राम अवधेश बाबू के दबाव देने पर सीताराम जी ने अपना टिकट शिवपूजन सिंह को दे दिया था. उनका कहना है कि तब राजनीति में त्याग की परंपरा जिंदा थी. आज भी सीताराम जी इतिहास को याद करते हुए अपने पुराने साथी लालू प्रसाद से मिलने केली बंगले पर पहुंचे. वे चाहते हैं कि राजनीति में अब शुचिता और ईमानदार छवि वाले युवा नेताओं को मौका मिले. लिहाजा करगहर विधानसभा से उमाशंकर गुप्ता की पैरवी करने आए हैं.
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