रांची: हाईकोर्ट की फटकार पर जागा प्रशासन, नदी किनारे से हटाया अतिक्रमण

अतिक्रमण हटाने के दौरान प्रशासन को लोगों का विरोध भी झेलना पड़ा

Ranchi News: लोगों का कहना है कि प्रशासन सिर्फ गरीबों को निशाना बनाता है. बारिश में आशियाना छीन जाने का दर्द इनकी आंखों से आंसू के रूप में दिखा.

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रांची. झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High court) की फटकार के बाद रांची में हिनू नदी के किनारे अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया. इस दौरान प्रशासन ने कई गरीबों को इस कोरोनाकाल में बेघर कर दिया. दरअसल अतिक्रमण के चलते रांची में जलाशय सिकुड़ते जा रहे हैं. इसको देखते हुए हाइकोर्ट ने जिला प्रशासन और नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई थी. जिसके बाद जिला प्रशासन के द्वारा मंगलवार को अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया.

प्रशासन को इस दौरान लोगों का विरोध झेलना पड़ा. लेकिन बड़ी संख्या में पुलिसबल की मौजदूगी से लोगों की एक न चली. लोगों का कहना है कि प्रशासन सिर्फ गरीबों को निशाना बनाता है. बारिश में आशियाना छीन जाने का दर्द इनकी आंखों से आंसू के रूप में दिखा.

एक महिला ने बताया कि जब इस बाबत नोटिस मिला था, तब उसके भाई ने घर में फंदे से झूल आत्महत्या कर ली. उसने कर्ज लेकर घर बनाया था. कर्च अभी चुकता भी नहीं हुआ है कि उसे तोड़ दिया गया.

अतिक्रमण हटाओ अभियान का शिकार कुछ ऐसे लोग भी हुए, जिन्होंने दबंगों से जमीन खरीदकर घर बनवाया था. इसके लिए इन्होंने दबंगों को मोटी रकम भी चुकाया था. अभियान के शिकार श्रीराम सिंह ने बताया चरकु नामक व्यक्ति से उन्होंने 5 लाख रुपए में जमीन खरीदी थी. उसी जमीन पर दो कमरों का घर बनाया था. लेकिन आज उसे भी तोड़ दिया गया.

अरगोड़ा सीओ रविन्द्र कुमार ओझा ने बताया कि अबतक अरगोड़ा अंचल में 75 घरों को नोटिस दिया गया है. जिनके खिकाफ़ कार्रवाई की जा रही है. वही इस अतिक्रमण में कुछ बड़े भवन भी शामिल हैं. नदी की जमीन का अतिक्रमण करने वालों में होटल एमराल्ड और वोडाफोन का कार्यालय भी शामिल हैं. इन इमारतों का कुछ हिस्सा अतिक्रमण के दायरे में है.

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