पिछले 18 साल में पहला मौका जब किसानों को समय पर बीज दे पाई झारखंड सरकार

झारखंड में अब तक 36 हजार क्विंटल बीज किसानों को मुहैया कराया जा चुका है.

कृषि विभाग (Agriculture Department) की गंभीरता के बावजूद कुछ जिले बीज वितरण में पिछड़ रहे हैं. इसकी बड़ी वजह लैंप पैक्स के सामने वित्तीय संकट का होना बताया जा रहा है.

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रांची. झारखंड में साल 2003 के बाद ये पहला मौका है, जब किसानों (Farmers) के बीच बीज का वितरण शुरू हो सका है. किसानों के बीच खरीफ फसल के बीज वितरण को लेकर कृषि विभाग गंभीर दिख रहा है. हालांकि विभाग की सख्ती के बाद भी राज्य के कुछ जिले ऐसे भी हैं, जो बीज वितरण में पिछड़ते नजर आ रहे हैं. अब तक 36 हजार क्विंटल बीज वितरण का दावा कृषि विभाग ने किया है. वहीं विभाग ने किसानों के लिये यूनिक आईडी बनाने की योजना तैयार की है, जो भविष्य में राज्य के किसानों के लिये मददगार साबित होगा.

कृषि निदेशक निशा उरांव सिंहमार के अनुसार इससे पहले साल 2003 के मई माह में सरकार समय पर किसानों को बीज देने में सफल हुई थी. कृषि विभाग के मुताबिक 50 हजार क्विंटल डिमांड के एवज में करीब 36 हजार क्विंटल बीज का वितरण हो चुका है. हाल के कुछ वर्षों में बीज वितरण का आंकड़ा 20 हजार से 21 हजार क्विंटल तक ही रहा था.

कृषि विभाग की गंभीरता के बावजूद कुछ जिले बीज वितरण में पिछड़ रहे है. इसकी बड़ी वजह लैंप पैक्स के सामने वित्तीय संकट का होना बताया जा रहा है. दरअसल सप्लायर बीज की सप्लाई तभी करती है, जब 50 प्रतिशत राशि का ड्राफ्ट लगाया जाता है. वित्तीय संकट को ध्यान में रखते हुये कृषि विभाग ने कृषक समूह से लेकर JSLPS से मदद की शुरुआत कर दी है.

झारखंड में हमेशा से ही किसानों की माली हालत दयनीय रही है. सरकार की योजना का लाभ किसान कम और बिचौलिए ज्यादा उठाते रहे हैं. ऐसे में अब कृषि विभाग ने किसानों के लिये यूनिक आईडी तैयार करने की योजना बनाई है. किसान रजिस्ट्रेशन कराने के बाद अपना आईडी प्राप्त कर सकते हैं. इससे किसानों को हर तरह की मिलने वाली योजना में मदद और विभाग को इसकी पूरी जानकारी आसानी से होगी.

वैसे तो झारखंड की पहचान खनिज संपदाओं के प्रदेश के तौर पर होती रही है. पर कृषि और पर्यटन के क्षेत्र में झारखंड के अंदर असीम संभावनाएं है. मगर इसके लिये जरूरी है सरकार की गंभीरता और योजनाओं का सही समय पर धरातल पर उतरना.

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