'लालू चालीसा' के बाद 'लालू चरित मानस', 27 साल की भक्ति के बदले चाहते हैं टिकट, मिलिए लालू के 'अनन्य भक्त' से

खुद को सुदामा और लालू को कृष्ण बताने वाले लीला यादव सीतामढ़ी के रहने वाले हैं.
खुद को सुदामा और लालू को कृष्ण बताने वाले लीला यादव सीतामढ़ी के रहने वाले हैं.

आरजेडी सुप्रीमो पर लालू चालीसा (Lalu Chalisa) लिखने वाले लीला यादव अब उनपर लालू चरित मानस लिख रहे हैं. 27 साल से लालू (Lalu Yadav) की भक्ति में लीन लीला बदले में एक अदद टिकट चाहते हैं.

  • Share this:
रांची. साल 1993 में लालू प्रसाद (Lalu Yadav) पर लिखा लालू चालीसा (Lalu Chalisa) काफी प्रसिद्ध हुआ था. चालीसा के बोल और भाव ऐसे थे कि लालू को मसीहा बताया गया. जिसके बाद लाखों लोग अपने घरों में लालू चालीसा रखने और गाने लगे थे. लालू चालीसा को लिखने वाले लीला यादव शुक्रवार को केली बंगले के बाहर लालू प्रसाद से मिलने की कोशिश में भटकते नजर आए.

न्यूज- 18 से मुलाकात में लीला यादव उर्फ लालबाबू राय ने कहा कि 30 साल लालू भक्ति और राजद की सेवा करने के बाद अब वो भी एक बार चुनावी मैदान में हाथ आजमाना चाहते हैं. लालू को कृष्ण और खुद को सुदामा मानने वाले लीला यादव ने अपनी बात को कुछ इस तरह रखा.
"रंग राम कृष्ण जस लालू के लीला"
"प्रसाद कर तू हे प्रणाम"
"सावल रंग बालक तिनू"
"नर देखा हूं नजरी पसार"



परिहार से टिकट चाहते हैं लीला यादव

करीब 52 वर्ष के लीला यादव अपने विधानसभा क्षेत्र सीतामढ़ी के परिहार से मैदान में उतरना चाहते हैं. और इसके लिए अपने कृष्ण रूपी लालू से आशीर्वाद मांगने केली बंगले पर पहुंचे थे.

सबकुछ सहा पर लालू भक्ति नहीं छोड़ी

लीला बताते हैं कि लालू के विरोधियों ने उन्हें कई बार उनपर लालू की भक्ति छोड़ने को लेकर दबाव डाला. यहां तक कि उनके हाथ भी तोड़ डाले, बावजूद इसके लीला यादव लालू के भक्ति रस को छोड़ने को तैयार नहीं हुए. लीला ने लालू के विरोधियों को इस रूप में जवाब दिया..
"चाहे जान जाए चाहे रखे लालू चालीसा"
"रोड बाईपास बसब करब लालू पर भरोसा"



अब लालू चरित मानस लिख रहे हैं

लीला यादव फिलहाल लालू प्रसाद पर श्री कलयुग पुत्र लालू चरित मानस लिख रहे हैं. जिसमें लालू के कांड, विवाह कांड, माता-पिता की स्थिति, गाय चराते हुए और 1974 का आंदोलन जैसे कई कालखंडों का वर्णन है. हालांकि इसमें चारा घोटाले का जिक्र नहीं किया गया है. पूछने पर लीला यादव बताते हैं,
"सुदामा सम प्रतीत लीला भिखारी"
"जग में तीन नाम किया आगारी"
"जग में सुंदर हैं तीन नाम"
"कहा लालू, कृष्ण या राम"

चारा घोटाले को लेकर ये है दलील 

लीला की माने तो कृष्ण के पास अनगिनत गायें थीं. बावजूद इसके चेहरे पर माखन लगाकर उन्हें माखन चोर बनाया गया. ठीक उसी तरह लालू प्रसाद पर भी चारा घोटाले का आरोप लगाकर उन्हें फंसाया गया है. लालू प्रसाद से मुलाकात की मंशा से लीला पिछले 3 दिनों से केली बंगले का चक्कर काट रहे हैं. लेकिन इस सुदामा की आवाज भगवान कृष्ण यानी लालू तक नहीं पहुंच पा रही.

लीला कहते हैं कि उन्हें धन की कोई लालसा नहीं, सिर्फ जनसेवा के लिए ही विधायक बनना चाहते हैं. अपनी बात को लीला कुछ इस तरह प्रकट
करते हैं.
"लालू लाल है जन जन के नेता"
"कुंदन राय मरछिया के बेटा"
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज