कृषि बिल को लेकर केन्द्र पर हेमंत का बड़ा हमला- तानाशाही कर किसानों पर थोपा गया

कृषि बिल को लेकर सीएम हेमंत सोरेन ने केन्द्र पर ताबड़तोड़ हमला बोला (फाइल फोटो)
कृषि बिल को लेकर सीएम हेमंत सोरेन ने केन्द्र पर ताबड़तोड़ हमला बोला (फाइल फोटो)

केन्द्र पर निशाना साधते हुए सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने कहा कि समझ में नहीं आता देश को पीएम किस दिशा में ले जा रहे हैं. राज्यों से सुझाव लिये बगैर कृषि बिल (Agricultural Bill) पर फैसले ले लिया गया

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रांंची. केन्द्र सरकार के कृषि बिल (Agricultural Bill) को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने काला कानून बताते हुए देश के किसानों (Farmers) के ऊपर इसे थोपने का आरोप लगाया. प्रोजेक्ट भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने केन्द्र पर निशाना साधते हुए कहा कि केन्द्र राज्यों के अधिकारों का हनन कर रही है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार से इस संबंध कोई सुझाव तक नहीं मांगा गया. बीजेपी शासित राज्यों ने भी कृषि नीति को लेकर समर्थन नहीं दिया होगा.

'खुदकुशी को मजबूर होंगे किसान' 

कृषि नीति में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे किसानों का कोई हित नहीं होगा. कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के दौरान यदि कॉन्ट्रैक्ट टूट जाय तो किसान न्यायालय का चक्कर लगाते रहेंगे और
बेबश होकर किसान आत्महत्या करेंगे.
'ये तानाशाही और गुंडागर्दी'



केन्द्र पर मनमानी का आरोप लगाते हुए सीएम ने कहा कि यह तो तानाशाही और गुंडागर्दी है. सीएम हेमंत ने पीएम पर निशाना साधते हुए कहा कि समझ में नहीं आता देश को पीएम किस दिशा में ले जा रहे हैं. कृषि केन्द्र सरकार के अधीन नहीं है. यह राज्य सरकार के पास है. हर राज्य के किसानों के तौर तरीके अलग हैं. ऐसे में राज्यों से बगैर सुझाव के केन्द्र ने फैसला ले लिया. इस कृषि नीति से किसानों का शोषण बढ़ेगा.



हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण स्तर पर किसानों के लिए व्यवस्था कर रही है. नाबार्ड के सहयोग से राज्य सरकार किसानों को सहायता पहुंचाएगी. इसके लिए राज्य सरकार 250 करोड़ का प्रावधान कर रही है.

'जहां का राजा व्यापारी, वहां की जनता भिखारी' 

उन्होंने कहा कि जिस देश का राजा व्यापारी होता है. उस देश की जनता भिखारी होती है. केन्द्र की कृषि नीति के खिलाफ लोग उलगुलान करेंगे. यह कृषि नीति किसानों के हित में नहीं है. पहले मौसम की मार किसान झेलते थे, अब कृषि नीति से किसान परेशान होंगे. आखिर अन्नदाता कहां जाएंगे.
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