Home /News /jharkhand /

कृषि कानून वापसी एक सियासी धूर्तता, जेएमएम बोली- राज्यों के चुनाव खत्म होते ही आएगा और खतरनाक कानून

कृषि कानून वापसी एक सियासी धूर्तता, जेएमएम बोली- राज्यों के चुनाव खत्म होते ही आएगा और खतरनाक कानून

जेएमएम ने कृषि बिल वापसी को चुनावी स्टंट बताया है.

जेएमएम ने कृषि बिल वापसी को चुनावी स्टंट बताया है.

JMM on Agriculture Law Withdrawal: जेएमएम महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि फरवरी और मार्च के बाद जब राज्यों का चुनाव समाप्त हो जायेगा, तो इससे भी खतरनाक कृषि कानून लाया जाएगा. आंदोलन के दौरान 700 किसानों की शहादत पर जवाब कौन देगा.

अधिक पढ़ें ...

    रिपोर्ट- निरंजन कुमार 

    रांची. मोदी सरकार द्वारा कृषि कानून वापस लिये जाने पर जेएमएम ने इसे चुनावी स्टंट बताया. पार्टी का आरोप है कि केन्द्र का ये फैसला आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर लिया है. पार्टी के केन्द्रीय महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि यह आंदोलन स्वतंत्र भारत में सबसे लंबे समय तक चला. पीएम ने तीनों काले कानून को वापस लेने की घोषणा की थी. इसे संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वापस लिया जाना चाहिए.

    जेएमएम महासचिव ने कहा कि यह फैसला आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए लिया गया है. बीजेपी सरकार पर किसानों और मजदूरों का भरोसा उठ गया है.बीजेपी की यह राजनीतिक धूर्तता है. इससे भी ज्यादा खतरनाक कानून की तैयारी कर रही है बीजेपी.

    जेएमएम नेता ने कहा कि 2014 में किसानों की आय दुगुनी करने की बात कही गई थी. 700 किसानों की शहादत का जवाब कौन देगा. गुजरात में एक मुर्गी का भी हलाल होता है, तो अमित शाह का दिल कांपने लगता है. क्या जिन किसानों ने शहादत दी, उनको भुलाया जा सकता है. सोनभद्र में किसानों पर गाड़ी चढ़ाने वाले मंत्री बने हुए हैं. आज तक भारतीय राजनीति में इससे पहले ऐसा कभी नहीं देखा गया.

    भट्टाचार्य ने कहा कि फरवरी और मार्च के बाद जब चुनाव समाप्त हो जायेगा, तो इससे भी खतरनाक कानून लाया जाएगा. अब आदिवासियों को टारगेट किया जा रहा है. जो फारेस्ट कानून लाया गया है, उससे आदिवासियों का जल जंगल जमीन पर सीधा हमला है. इस कानून को वापस करने के लिए जो संघर्ष हुआ उसको भुलाया नहीं जा सकता है.

    उधर, कृषि कानून वापसी की घोषणा को सीएम हेमंत सोरेन ने हास्यास्पद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा है कि मोदी सरकार पहले गला दबाते हैं, फिर गले लगाते हैं. किसानों का हितैषी बनने को लेकर बीजेपी का प्रयास अब काम नहीं आएगा. जनता के बीच इनका चेहरा उजागर हो चुका है.

    हेमंत सोरेन ने किसान आंदोलन में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए 5 – 5 करोड़ रुपया का मुआवजा, नौकरी और खेती नहीं कर पाने वाले किसानों को 10 – 10 लाख रुपया और आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमा वापस लेने की मांग की. सीएम ने कहा कि भविष्य की राजनीति और चुनाव को देखकर यह निर्णय लिया गया है.

    Tags: Jharkhand mukti morcha, Modi Govt, Three Agricultural Laws

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर