वज्रपात के 3 घंटे पहले से ही मोबाइल पर मिलने लगेगा अलर्ट मैसेज, सरकार ने तैयार किया यह प्लान
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वज्रपात के 3 घंटे पहले से ही मोबाइल पर मिलने लगेगा अलर्ट मैसेज, सरकार ने तैयार किया यह प्लान
झारखंड की भगौलिक बनावट के चलते हर साल यहां इस प्राकृतिक आपदा का कहर कुछ ज्यादा ही होता है. (सांकेतिक फोटो)

झारखंड (Jharkhand) के लिए वज्रपात सबसे बड़ा प्राकृतिक आपदा है. राज्य में हर साल 150 से ज्यादा लोगों की वज्रपात से मौत हो जाती है.

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रांची. आसमानी बिजली (Thunderclap) से बचाने के लिए हेमन्त सोरेन की सरकार (Hemant Soren Government ) ने एक बड़ी और कारगर योजना बनाई है. झारखंड के आपदा विभाग, मौसम केंद्र रांची और बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ने मिलकर एक ऐसी फुलप्रूफ व्यवस्था शुरू करने का प्लान तैयार किया है, जिसके तहत मौसम केंद्र वज्रपात की तात्कालिक चेतावनी (Instant warning) जारी करेगा. खास कर उन क्षेत्र के बारे में चेतावनी जारी की जाएगी, जहां अगने तीन घंटे में वज्रपात की आशंका हो. कहा जा रहा है कि चेतावनी जारी होते है उस क्षेत्र के लोगों के मोबाइल पर अलर्ट (Mobile alert) और बचाव का मैसेज आना शुरू हो जाएगा.

झारखंड के लिए वज्रपात सबसे बड़ा प्राकृतिक आपदा है. राज्य में हर साल 150 से ज्यादा लोगों की वज्रपात से मौत हो जाती है, जिसमें सबसे ज्यादा संख्या किसानों और मजदूरों की होती है. वहीं, इसके साथ- साथ बड़ी संख्या में पशुओं की भी मौत वज्रपात के चलते होती है, जिससे किसानों-पशुपालकों की आर्थिक स्थिति भी खराब हो जाती है.

क्यों होता है वज्रपात?
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि एवं मौसम विभाग के HOD डॉ. ए बदुद कहते हैं कि गर्मी बढ़ने के साथ ही स्थानीय स्तर की नमी वाष्पीकृत होकर ऊपर उठता है. ऐसे में छोटे- छोटे पैचेज के बादल बनते हैं. जब ये बादल अलग अलग स्पीड में भ्रमण करते हैं तो -ve और +ve आयन अलग हो जाते हैं. बादल के ऊपर पॉज़िटिव और बादल के नीचे नेगेटिव आयन के जमा होने के से मेघ गर्जन वाले बादल में बदल जाते हैं. ऐसे में जब बादल धरती के काफी करीब आता है तो जो हवा उसके लिए इंसुलेटर का काम कर रही होती है. वह चंद सेकेंड के लिए कंडक्टर का काम करता है. ऐसे में फ्रैक्शन ऑफ सेकंड के लिए हवा का तापमान सूर्य के तापमान से भी 4 गुणा से भी ज्यादा (28000 डिग्री सेल्सियस) हो जाता है. इसी गर्मी से हवा में तेज फैलाव होता है जिसकी आवाज हम सुनते हैं.
समुद्रतल से ऊंचाई के चलते झारखंड में वज्रपात का खतरा ज्यादा


झारखंड की भगौलिक बनावट के चलते हर साल यहां इस प्राकृतिक आपदा का कहर कुछ ज्यादा ही होता है. विशेषज्ञों की माने तो झारखण्ड की ऊंचाई समुद्रतल से 220 मीटर से 2200 मीटर है. ऐसे में बादल जब एक निश्चित ऊंचाई पर ही बनते है तो धरती और बादल की दूरी काफी कम होती है. ऐसे में झारखंड में वज्रपात की आशंका अधिक होती है. झारखंड में क्लाउड टू अर्थ लाइटनिंग ज्यादा होती है. जबकि मैदानी इलाके में क्लाउड टू क्लाउड लाइटनिंग ज्यादा होती है.

वज्रपात को लेकर गंभीर है सरकार
अब इस प्राकृतिक विपदा से निपटने के लिए हेमन्त सरकार ने प्राधिकरण बनाया है. साथ ही पहली बार BAU, मौसम केंद्र के साथ मिलकर स्पेसिफिक एरिया अलर्ट ऑन मोबाइल सिस्टम शुरू कर रही है. इस योजना में मोबाइल टावर बेस्ड क्षेत्र में वज्रपात की चेतावनी लोगों को 3 घंटे पहले मिल जाया करेगी. ताकि समय रहते लोग वज्रपात से बच सकें. सूबे के आपदा मंत्री बन्ना गुप्ता ने news18 से कहा कि हमारी सरकार को झारखण्ड के एक- एक व्यक्ति चाहे वह मजदूर हो या किसान सभी की जान का परवाह है. इसलिए सरकार ऐसी व्यवस्था कर रही है कि जिस इलाके में वज्रपात की चेतावनी होगी उस इलाके के मोबाइल टावर से जितने मोबाइल जुड़े होंगे सबको अलर्ट मैसेज मिल जाएगा.
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